menu-icon
India Daily

वेनेजुएला में उलझा रहा अमेरिका, दूसरी तरफ 'दोस्त' के घर पर हो गई एयर स्ट्राइक; फाइटर जेट्स ने बरसाए बम

जब अमेरिका वेनेजुएला में मादुरो को लेकर कार्रवाई में जुटा था, उसी दौरान ब्रिटेन और फ्रांस ने सीरिया में आईएसआईएस के ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमला किया. यह ऑपरेशन आतंकवाद के पुनरुत्थान को रोकने का संदेश माना जा रहा है.

Kanhaiya Kumar Jha
वेनेजुएला में उलझा रहा अमेरिका, दूसरी तरफ 'दोस्त' के घर पर हो गई एयर स्ट्राइक; फाइटर जेट्स ने बरसाए बम
Courtesy: X/@WajihaTamseel

नई दिल्ली: दुनिया के अलग अलग हिस्सों में एक साथ चल रही सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति की जटिल तस्वीर पेश कर दी है. एक ओर अमेरिका वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लेकर सख्त कार्रवाई कर रहा था, वहीं दूसरी ओर उसके नए सहयोगी सीरिया में नाटो के दो बड़े सदस्य देशों ब्रिटेन और फ्रांस ने हवाई हमले किए. इन हमलों का निशाना आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के ठिकाने बने, जो वर्षों बाद भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बना हुआ है.

शनिवार शाम ब्रिटेन और फ्रांस की वायु सेनाओं ने मिलकर सीरिया में आईएसआईएस के संदिग्ध ठिकानों पर बमबारी की. ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह हमला प्राचीन शहर पल्मायरा से कुछ मील उत्तर पहाड़ी इलाके में स्थित एक भूमिगत सुविधा पर किया गया. माना जा रहा है कि इस स्थान का इस्तेमाल हथियारों और विस्फोटकों के भंडारण के लिए किया जा रहा था. यह कार्रवाई दोनों देशों के बीच सैन्य समन्वय का अहम उदाहरण रही.

रॉयल एयर फोर्स की भूमिका

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस अभियान में रॉयल एयर फोर्स के टाइफून एफजीआर4 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया. फ्रांसीसी वायुसेना के विमान भी इस संयुक्त ऑपरेशन का हिस्सा थे. ब्रिटिश विमानों ने पेववे IV निर्देशित बमों से उन सुरंगों को निशाना बनाया, जो कथित रूप से भूमिगत भंडारण केंद्र तक जाती थीं. शुरुआती आकलन में लक्ष्य के सफलतापूर्वक नष्ट होने के संकेत मिले हैं.

ब्रिटिश सरकार का बयान

ब्रिटेन के रक्षा सचिव जॉन हीली ने इस हमले को आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई दिखाती है कि ब्रिटेन अपने सहयोगियों के साथ मिलकर मध्य पूर्व में आईएस और उसकी हिंसक विचारधारा के किसी भी पुनरुत्थान को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है. उनका कहना था कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं. फिलहाल सीरियाई सरकार की ओर से इन हमलों पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है.

आईएस का खतरा अब भी कायम

हालांकि आईएस को 2019 में सीरिया में सैन्य हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन संगठन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के अनुसार, सीरिया और इराक में आईएस के 5000 से 7000 लड़ाके अब भी सक्रिय हैं. ये स्लीपर सेल के रूप में काम कर रहे हैं और समय समय पर घातक हमले कर रहे हैं. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय गठबंधन लगातार सतर्क बना हुआ है.

पिछले हमलों से जुड़ी कड़ी

गौर करने वाली बात यह भी है कि पिछले महीने ट्रंप प्रशासन ने सीरिया में आईएस के खिलाफ सैन्य हमले शुरू किए थे. ये हमले पल्मायरा के पास हुए एक घातक हमले के जवाब में किए गए थे, जिसमें दो अमेरिकी सैनिक और एक अमेरिकी नागरिक दुभाषिया मारे गए थे. हालिया ब्रिटेन फ्रांस कार्रवाई को उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका मकसद आईएस की सैन्य क्षमता को पूरी तरह कमजोर करना है.