महाराष्ट्र की राजनीति में एक सोशल मीडिया पोस्ट ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. कांग्रेस द्वारा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार पर की गई टिप्पणी के बाद महायुति और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं. एनसीपी कार्यकर्ताओं ने मुंबई में कांग्रेस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और बिना शर्त माफी की मांग उठाई. वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और एनसीपी के अन्य नेताओं ने कांग्रेस पर तीखे आरोप लगाए. मामला अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर सम्मान और मर्यादा की बहस तक पहुंच गया है.
पूरा विवाद कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट के बाद शुरू हुआ. पोस्ट में सुनेत्रा पवार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्हें 'गूंगी गुड़िया' कहा गया. इस टिप्पणी के सामने आते ही सत्ताधारी महायुति के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. एनसीपी कार्यकर्ताओं ने मुंबई स्थित कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर तत्काल माफी की मांग की.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस पर राजनीतिक स्तर गिराने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि विपक्ष जनता का समर्थन खो चुका है और सिर्फ चर्चा में बने रहने के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रहा है. उनके मुताबिक महाराष्ट्र की राजनीति में इस तरह की भाषा स्वीकार नहीं की जा सकती और इससे लोकतांत्रिक मर्यादाएं प्रभावित होती हैं.
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस टिप्पणी को केवल सुनेत्रा पवार नहीं, बल्कि राज्य की सभी महिलाओं का अपमान बताया. उन्होंने कहा कि सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री हैं और उनके खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग दोहराई.
एनसीपी (शरद चंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने इस विवाद को अलग नजरिए से देखा. उन्होंने कहा कि 'गूंगी गुड़िया' शब्द आपत्तिजनक माना जा सकता है, लेकिन यही शब्द कभी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए भी इस्तेमाल किया गया था. उन्होंने कहा कि इतिहास बताता है कि राजनीतिक उपाधियां किसी नेता की क्षमता तय नहीं करतीं.
अजित पवार के निधन के बाद जनवरी 2026 में सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था. वह महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री भी हैं. इसी वजह से उनके खिलाफ हुई टिप्पणी ने राजनीतिक रंग और गहरा कर दिया है. अब कांग्रेस और महायुति के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है.