दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के परिणाम सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी ने 'जेन-जी' यानी 18 से 28 वर्ष के युवा मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की कवायद तेज कर दी है. इस बार डूसू चुनाव में 40.46% वोटिंग दर्ज की गई, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है. पार्टी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए छात्र राजनीति के जरिए सीधे युवाओं तक पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही है.
नतीजे घोषित होते ही दिल्ली बीजेपी और एबीवीपी के नेताओं ने इंस्टाग्राम रील्स, मीम्स और 'हम_सुनेंगे' हैशटैग के साथ सोशल मीडिया कैंपेन शुरू कर दिया है. नेताओं ने फीस वृद्धि, प्लेसमेंट, स्कॉलरशिप और कैंपस सुरक्षा जैसे प्राथमिक मुद्दों पर वीडियो शेयर किए हैं. पार्टी का मानना है कि आज की राजनीति में केवल भाषण नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सीधा संवाद बेहद जरूरी है.
एबीवीपी नेताओं का कहना है कि आज का युवा सवाल पूछता है और पार्टी उनकी भाषा में जवाब देने के लिए तैयार है. दूसरी ओर, विश्वविद्यालय के छात्रों की राय इस पर बंटी हुई नजर आती है. कई छात्रों का कहना है कि चुनावी समय में पार्टियां सक्रिय हो जाती हैं, लेकिन उन्हें रील्स के बजाय स्कॉलरशिप और रोजगार जैसे ठोस कदम चाहिए.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनाव में जेन-जी वोट बैंक अब सबसे निर्णायक भूमिका निभा रहा है. जो भी राजनीतिक दल इस वर्ग की जरूरतों और सोच को समझेगा, उसे चुनावी बढ़त मिलेगी. डूसू चुनाव के नतीजे और उसके बाद शुरू हुई यह डिजिटल सियासत इसी का उदाहरण है, जिसका असर आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति पर भी दिखेगा.