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India Daily

'या तो अभिषेक या मैं...', कल्याण बनर्जी ने ममता के करीबी पर लगाया ये आरोप; TMC में हुआ बड़ा बवाल

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली और व्यवहार पर सवाल उठाए हैं. उनके बयान ने पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों को उजागर कर दिया है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
'या तो अभिषेक या मैं...', कल्याण बनर्जी ने ममता के करीबी पर लगाया ये आरोप; TMC में हुआ बड़ा बवाल
Courtesy: @HALDERSAN X Account

नई दिल्ली: ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आते दिख रहे हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने गुरुवार को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनके बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है.

मीडिया से बातचीत में कल्याण बनर्जी ने कहा कि अभिषेक बनर्जी के व्यवहार और कार्यशैली ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि अभिषेक खुद को हर परिस्थिति में सर्वोच्च मानते हैं और उनका रवैया कई वरिष्ठ नेताओं के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है. 

कल्याण बनर्जी ने आगे क्या कहा?

कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी और ममता बनर्जी के लिए लगातार काम करने के बावजूद मौजूदा हालात में उनके लिए पार्टी में काम करना मुश्किल होता जा रहा है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कल्याण बनर्जी लंबे समय से ममता बनर्जी के करीबी सहयोगियों में गिने जाते रहे हैं. ऐसे में उनका सार्वजनिक रूप से अभिषेक बनर्जी की आलोचना करना पार्टी के भीतर गहरे मतभेदों की ओर संकेत माना जा रहा है.

कैसी है अभी पार्टी की स्थिति?

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन का सामना करना पड़ा. पिछले तीन चुनावों में 200 से अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी इस बार काफी कम सीटों तक सिमट गई. चुनावी नतीजों के बाद संगठन के भीतर नेतृत्व, रणनीति और कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

पार्टी के भीतर क्या चल रही चर्चा?

पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि पिछले कुछ वर्षों में संगठन के कई वरिष्ठ नेता निर्णय प्रक्रिया से खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं. विपक्षी दलों ने भी तृणमूल कांग्रेस पर संगठनात्मक कमजोरी और नेतृत्व संकट के आरोप लगाए हैं.

इसी बीच खबरें सामने आई हैं कि पार्टी के कुछ सांसद नेतृत्व को लेकर असंतोष जता रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि कुछ नेता भविष्य की रणनीति पर नए विकल्प तलाश सकते हैं. हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.