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गुड़ामालानी विधानसभा सीट: इस सीट पर जाट की करते हैं हार जीत का फैसला, आजादी के बाद यहां केवल दो बार ही हारी है कांग्रेस

साल 2018 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो उस दौरान इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी हेमा राम चौधरी ने भाजपा प्रत्याशी लादूराम को करारी शिकस्त दी थी.

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Sagar Bhardwaj
गुड़ामालानी विधानसभा सीट: इस सीट पर जाट की करते हैं हार जीत का फैसला, आजादी के बाद यहां केवल दो बार ही हारी है कांग्रेस

नई दिल्ली: पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले में आने वाला गुड़ामालानी विधानसभा क्षेत्र कोमालाणी क्षेत्र के नाम से जाना जाता है. यह क्षेत्र खनिज तेल के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है. भारत का 30 फीसदी खनिज तेल गुड़ामालानी से निकाला जाता है. गुड़ामालानी बाड़मेर जिले का तीसरा सबसे बड़ा शहर है. 

वैसे तो गुड़ामालानी सीट पर ज्यादातर कांग्रेस का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार का मुकाबला यहां बेहद दिलचस्प होने जा रहा है क्योंकि इस बार यहां कांग्रेस, बीजेपी, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच मुकाबला तो जरूर होगा, लेकिन वर्तमान विधायक हेमा राम चौधरी इस बार मैदान में नहीं उतरेंगे. उन्होंने पहले ही इस बार चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी है.

इस सीट पर हमेशा लोगों ने दिया है हाथ का साथ
साल 2018 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो उस दौरान इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी हेमा राम चौधरी ने भाजपा प्रत्याशी लादूराम को करारी शिकस्त दी थी. हेमा राम ने लाडू राम को 13564 वोटों से हराया था. हेमा राम को 93433 जबकि लाडू राम को 79869 वोट मिले थे.

इससे पहले 1998, 2003, 2008 में लगातार तीन बार कांग्रेस के टिकट पर हेमा राम चौधरी ने ही इस सीट पर चुनाव जीता.  हालांकि 2013 में यह सीट बीजेपी के पास चली गयी.

जाट करते हैं हार-जीत का फैसला
गुड़ामालानी विधानसभा सीट बाड़मेर की वो सीट है जिसके नाम जातिगत वोट बैंक के जरिए जीत पक्की करने का रिकॉर्ड है. 
आजादी के बाद गुड़ामालानी सीट पर 13 बार विधानसभा के चुनाव हुए हैं, जिनमें से केवल एक बार बीजेपी और एक बार जनता दल ने जीत दर्ज की है बाकी 11 बार यहां कांग्रेस ने विजय पताका लहराई है. इस सीट की एक और खास बात यह रही है कि यहां 11 बार जाट जाति के ही प्रत्याशी ने चुनाव जीता है, लेकिन 2013 में बीजेपी के लाडू राम बिश्नोई इस दबदबे को तोड़ने में कामयाब रहे थे.

जाट मतदाताओं के बाद यहां दूसरे नंबर पर सबसे अधिक मतदाता बिश्नोई समाज से आते हैं. साल 1957 में इस सीट पर कांग्रेस के रामदान चौधरी ने जीत दर्ज की थी. उसके बाद लगातार चार बार उनके बेटे कांग्रेस के टिकट पर यहां से चुनाव जीते. साल 2013 के विधानसभा चुनावों में पहली बार इस सीट पर किसी गैर जाट (बीजेपी के लादूराम बिश्नोई) ने जीत हासिल की थी.

गुड़ामालानी का जातीगत समीकरण
गुड़ामालानी एक सामान्य सीट है. साल 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या 362405 है जिसका 98.2 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 1.8 प्रतिशत हिस्सा शहरी है. कुल आबादी की बात की जाए तो यहां की आबादी का 15.55 फीसदी लोग अनुसूचित जाति , 5.25 फीसदी जनजाति से आते हैं.

क्या हेमाराम की गैर-मौजूदगी बीजेपी के लिए बनेगी अवसर
गुड़ामालानी के वर्तमान विधायक हेमाराम चौधरी इस बार चुनाव न लड़ने का मन बना चुके हैं. उन्होंने इस बात का ऐलान भी कर दिया है. इसके बाद भी उन्हें दावेदार माना जा रहा है. वहीं दूसरी ओर बीजेपी की ओर से पूर्व विधायक लादूराम बिश्नोई के बेटे केके बिश्नोई इस सीट पर दावेदारी कर रहे हैं. अब देखना यह होगा कि इस हेमा राम चौधरी के बगैर कांग्रेस इस सीट को बचा पाने में कामयाब हो पाती है या नहीं.

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