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राम का 'डर' या सोशल इंजीनियरिंग, सपा ने मेरठ से अतुल प्रधान को क्यों दिया टिकट?

Lok Sabha Elections 2024: मेरठ में गुर्जर वोटर निर्णायक स्थिति में हैं. रालोद-बीजेपी गठबंधन की वजह से बीजेपी की ओर से यह दिखाने की कोशिश हो रही है कि उनकी जाट वोट बैंक पर मजबूत पकड़ है. सपा ने गुर्जरों को साधने के लिए यह सियासी दांव चला है.

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India Daily Live
Courtesy: सोशल मीडिया

मेरठ संसदीय सीट से समाजवादी पार्टी ने अचानक उम्मीदवार बदल दिया है. सपा और विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया (INDIA) की ओर से अतुल प्रधान चुनावी मैदान में हैं. वहीं इस सीट से राष्ट्रीय लोक दल (RLD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन ने रामायण के 'राम' अरुण गोविल को उतारा है. अरुण गोविल, के समर्थकों की संख्या लाखों में आज भी है. राजेंद्र अग्रवाल की जगह अरुण गोविल के आने से बीजेपी मेरठ में आश्वस्त है.

समाजवादी पार्टी ने अचानक इस लोकसभा सीट पर अपने उम्मीदवार को बदल दिया है. पहले मेरठ से भानु प्रताप सिंह चुनाव लड़ने वाले थे लेकिन अचानक उनकी जगह अतुल प्रधान को टिकट दे दिया गया. भानु प्रताप सिंह पेशे से एक वकील हैं.

अतुल प्रधान की वजह से दिलचस्प हुई लड़ाई

अतुल प्रधान मेरठ की सरधना सीट से विधायक हैं. साल 2022 में हुए यूपी विधानसभा चुनावों में सरधना सीट से ही बीजेपी के चर्चित नेता संगीत सोम भी चुनाव लड़े थे. उन्हें अतुल प्रधान से प्रचंड योगी-मोदी लहर में भी हार मिली थी.

अतुल प्रधान गुर्जर समुदाय से आते हैं. उनकी गुर्जर वोटरों पर मजबूत पकड़ है. मेरठ लोकसभा सीट पर गुर्जर वोटर मजबूत स्थिति में हैं और निर्णायक भूमिका निभाते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुतबाबिक एक तरफ जब जाट और दूसरी प्रभावशाली जातियों के बड़े नेता बीजेपी में है, सपा ने एक और महत्वपूर्ण जाति को लुभाने की कोशिश की है.

MY ही नहीं, अतुल प्रधान के आने से सधा ये समीकरण

समाजवादी पार्टी अब तक मुस्लिम और यादव (M-Y) फॉर्मूले पर काम करती है. जब तक जयंत चौधरी साथ थे, सपा जाट वोटरों को भी अपने खेमे में मानती थी. अब राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के साथ आने से बीजेपी जाट वोटरों पर अपना दावा ठोक रही है. सपा ने सोशल इंजीनियरिंग संभालने के लिए मुस्लिम, यादव और गुर्जरों को साधने की कोशिश की है.

कौन हैं अतुल प्रधान?

अतुल प्रधान, छात्र नेता रहे हैं. चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में पढ़ने के दौरान अतुल प्रधान के नाम की तूती बोलती थी. अतुल प्रधान सपा छात्र महासभा के अध्यक्ष भी रहे हैं. साल 2012 के विधानसभा चुनाव में अतुल प्रधान पहली बार विधानसभा चुनवा लड़े थे. वह इस चुनाव में तीसरे स्थान पर थे.

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें संगीत सोम से हार मिली. साल 2022 में उन्होंने संगीत सोम को हरा दिया. अतुल प्रधान और संगीत सोम की अदावत जगजाहिर है. अब अतुल प्रधान सपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. सपा ने सही वक्त पर तुरुप का इक्का चला है. 

राम का डर या सोशल इंजीनियरिंग, क्यों सपा ने अतुल प्रधान पर जताया भरोसा?

अतुल प्रधान के आने की वजह से मेरठ के सियासी समीकरण और दिलचस्प हो गए हैं. एक तरफ रामायण टीवी सीरियल से घर-घर में लोकप्रिय हुए अरुण गोविल हैं, दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी से देवव्रत त्यागी इस सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं. 

राजनीति में जब भी सितारे उतरते हैं, उन्हें लाभ मिलता है. बीजेपी सनी देओल, हेमा मालिनी से लेकर दिनेश लाल यादव और मनोज तिवारी तक, कई ऐसे चेहरे हैं जो स्टार थे और जिन्हें जनता ने जमकर वोट भी दे दिया. ऐसे में अरुण गोविल को भी इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने मेरठ सीट से उतारा है.

बीजेपी ने यूपी में 80 लोकसभा सीटों का लक्ष्य रखा है, इसके जवाब में सपा ने ऐसी सोशल इंजीनियरिंग की है कि यह टार्गेट आसान तो नहीं होने वाला है. गुर्जर, मुस्लिम और यादवों को साधने की इस पहल से अखिलेश यादव ने एक तीर से कई निशाने लगाए हैं. अतुल प्रधान स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं. उनकी धरातल पर मजबूत पकड़ मानी जाती है. आने वाले दिनों में यहां की सियासी लड़ाई दिलचस्प होगी.

कब हैं मेरठ में चुनाव?
मेरठ में 26 अप्रैल को वोटिंग है. इस लोकसभा सीट पर नामांकन की प्रक्रिया 28 मार्च से ही शुरू है लेकिन नामांकन की अंतिम तारीख 4 अप्रैल है. 8 अप्रैल तक नाम वापस लिए जा सकेंगे. चुनाव के नतीजे 4 जून को आएंगे.
 

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