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10वीं में असफलता, राजनीति में चमकी किस्मत; जानिए अजित पवार का एकेडमिक बैकग्राउंड

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवा का राजनीतिक कद उनकी शैक्षणिक योग्यता से कहीं बड़ा माना जाता है. पढ़ाई में औसत रहने के बावजूद उन्होंने प्रशासन और राजनीति में लंबा अनुभव हासिल किया.

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Edited By: Reepu Kumari
10वीं में असफलता, राजनीति में चमकी किस्मत; जानिए अजित पवार का एकेडमिक बैकग्राउंड
Courtesy: Pinterest

अजित पवार अब इस दुनिया में नहीं हैं. प्लेन क्रैश में उनकी जान चली गई. अपने पीछे वो अपनी कई यादें छोड़ गए हैं. पवार महाराष्ट्र की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं. वे कई बार उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और अपने सख्त फैसलों के लिए चर्चा में रहते हैं. आमतौर पर नेताओं की पढ़ाई को लेकर सवाल उठते हैं, ऐसे में अजित पवार की शैक्षणिक यात्रा भी लोगों की जिज्ञासा का विषय रही है. उनकी कहानी यह बताती है कि नेतृत्व केवल डिग्रियों पर निर्भर नहीं करता.

पुणे जिले के बारामती से उभरे अजित पवार का झुकाव छात्र जीवन से ही सार्वजनिक और सामाजिक गतिविधियों की ओर रहा. परिवार का राजनीतिक माहौल और जमीनी मुद्दों से जुड़ाव ने उनके जीवन की दिशा तय की. पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक अनुभवों ने उन्हें राजनीति के लिए तैयार किया.

जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में हुआ था. वे एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे हैं. राजनीतिक परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई. समर्थकों के बीच वे ‘दादा’ के नाम से जाने जाते हैं. ग्रामीण महाराष्ट्र से उनका गहरा जुड़ाव उनकी राजनीति की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है.

दसवीं में असफलता, फिर दोबारा सफलता

अपनी पढ़ाई को लेकर अजित पवार हमेशा ईमानदार रहे हैं. उन्होंने बताया है कि वे दसवीं कक्षा में एक विषय में असफल हो गए थे. हालांकि अगले वर्ष उन्होंने उसी विषय की परीक्षा दोबारा दी और पास हो गए. वे खुद को पढ़ाई में बहुत तेज छात्र नहीं मानते थे, लेकिन असफलता से सीख लेना उनके स्वभाव का हिस्सा रहा.

बी.कॉम अधूरी, खुद को बताते हैं 12वीं पास

अजित पवार ने आगे बी.कॉम की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन उनकी डिग्री पूरी नहीं हो सकी. उनका एक सेमेस्टर बाकी रह गया था और नियमों के कारण वे परीक्षा नहीं दे पाए. इसी वजह से वे खुद को हमेशा 12वीं पास ही बताते रहे हैं. उन्होंने कभी अपनी अधूरी पढ़ाई को छिपाने की कोशिश नहीं की.

छात्र जीवन से ही सामाजिक गतिविधियों में रुचि

कॉलेज के दिनों से ही अजित पवार का रुझान सामाजिक और सार्वजनिक कार्यों की ओर बढ़ गया था. स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय रहना और लोगों की समस्याएं सुनना उनके स्वभाव में शामिल था. यही अनुभव आगे चलकर उन्हें सक्रिय राजनीति में ले गया और जनता से उनका सीधा रिश्ता बना.

शिक्षा से ज्यादा अनुभव बना ताकत

अजित पवार की कहानी यह साबित करती है कि सफलता के लिए केवल डिग्री ही सब कुछ नहीं होती. सीमित शैक्षणिक योग्यता के बावजूद उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति में शीर्ष स्थान हासिल किया. प्रशासनिक अनुभव, जमीनी समझ और लगातार मेहनत ने उन्हें एक प्रभावशाली नेता बनाया.