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India Daily

CWG 2026: 'SMILING ASSASIN' अरुंधति ने मारा गोल्डन पंच, इंग्लैंड की चैंपियन को धोकर भारत को दिलाया गोल्ड

Commonwealth games 2026 में अरुंधति चौधरी ने महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग में इंग्लैंड की चैंटल रीड को हराकर गोल्ड मेडल जीता.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
CWG 2026: 'SMILING ASSASIN' अरुंधति ने मारा गोल्डन पंच, इंग्लैंड की चैंपियन को धोकर भारत को दिलाया गोल्ड
Courtesy: X

ग्लासगो में खेले जा रहे Commonwealth games 2026 में भारत की युवा मुक्केबाज अरुंधति चौधरी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग का गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया. फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड की चैंटल रीड को हराकर भारत के लिए एक और बड़ी सफलता हासिल की और देश की पदक संख्या बढ़ाई.

फाइनल में दिखाया दमदार खेल

अरुंधति चौधरी ने फाइनल मुकाबले में शुरुआत से ही आत्मविश्वास के साथ खेल दिखाया. उनका मुकाबला इंग्लैंड की मजबूत मुक्केबाज चैंटल रीड से था लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने पूरे मैच में अपनी पकड़ बनाए रखी. तेज फुटवर्क, सही समय पर लगाए गए पंच और शानदार डिफेंस की बदौलत उन्होंने विरोधी को वापसी का मौका नहीं दिया. तीसरे और आखिरी राउंड में अरुंधति पूरी तरह हावी रहीं. जजों ने उन्हें 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से विजेता घोषित किया. इस जीत के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर भारतीय बॉक्सिंग के शानदार अभियान को आगे बढ़ाया.

भारत का शानदार बॉक्सिंग अभियान

अरुंधति के गोल्ड मेडल के बाद भारत की पदक तालिका और मजबूत हो गई. भारत अब कुल 34 पदकों के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गया है, जिसमें 11 गोल्ड, 15 सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं. बॉक्सिंग में भारत का प्रदर्शन इस बार बेहद शानदार रहा है. शाम के सत्र में खेले गए मुकाबलों में भारतीय मुक्केबाजों ने लगातार जीत दर्ज की. पहले छह फाइनल मुकाबलों में भारत ने पांच गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीतकर यह साबित कर दिया कि भारतीय बॉक्सिंग लगातार नए मुकाम हासिल कर रही है. अरुंधति की जीत भी इसी सफलता की अहम कड़ी बनी.

बास्केटबॉल से बॉक्सिंग तक का सफर

अरुंधति चौधरी की कहानी मेहनत और हिम्मत की मिसाल है. बचपन में वह पढ़ाई के साथ-साथ बास्केटबॉल खेलती थीं और स्कूल टीम की कप्तान भी रह चुकी हैं. उनके नेतृत्व में स्कूल ने जिला और राज्य स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया. बाद में उन्होंने व्यक्तिगत खेल में करियर बनाने का फैसला किया और बॉक्सिंग चुनी. उस समय कोटा में बॉक्सिंग की अच्छी सुविधा नहीं थी लेकिन उन्होंने अपने पिता से सिर्फ एक अच्छे कोच की मांग की. परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने लगातार आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई. अब कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि कठिन हालात भी मजबूत इरादों को रोक नहीं सकते.