menu-icon
India Daily

Bcoz से LOL तक, एग्जाम कॉपियों में चैटिंग भाषा; इस यूनिवर्सिटी में खुली छात्रों की पढ़ाई की पोल

मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल का असर अब परीक्षाओं में साफ दिखने लगा है. कुमाऊं विश्वविद्यालय की हालिया परीक्षाओं की आंसर शीट्स में छात्रों ने चैटिंग भाषा और शॉर्टकट शब्दों का जमकर इस्तेमाल किया है.

reepu
Edited By: Reepu Kumari
Bcoz से LOL तक, एग्जाम कॉपियों में चैटिंग भाषा; इस यूनिवर्सिटी में खुली छात्रों की पढ़ाई की पोल
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: डिजिटल युग में मोबाइल फोन छात्रों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक हर काम स्मार्टफोन पर निर्भर होता जा रहा है. इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ने और लिखने की आदतों पर पड़ रहा है. अब यह बदलाव केवल क्लासरूम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परीक्षाओं की आंसर शीट्स में भी नजर आने लगा है, जिसने शिक्षकों को चिंता में डाल दिया है.

कुमाऊं विश्वविद्यालय की हालिया ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट परीक्षाओं के मूल्यांकन के दौरान सामने आए मामलों ने शिक्षा व्यवस्था की एक गंभीर तस्वीर पेश की है. छात्र परीक्षा में पारंपरिक भाषा की जगह चैटिंग स्लैंग का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे न सिर्फ उत्तरों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि छात्रों की बुनियादी लेखन क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं.

मूल्यांकन में सामने आई चौंकाने वाली हकीकत

हल्द्वानी स्थित एमबीपीजी कॉलेज में चल रहे मूल्यांकन कार्य के दौरान शिक्षकों को कई आंसर शीट्स में असामान्य भाषा देखने को मिली है. Because की जगह Bcoz, Before के लिए B4, Between के लिए B/w और And के लिए & जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है. कुछ कॉपियों में LOL जैसे शब्द भी लिखे मिले हैं, जो आमतौर पर मोबाइल चैटिंग में इस्तेमाल होते हैं.

हाइब्रिड भाषा और अधूरे उत्तर बने समस्या

परीक्षकों के अनुसार कई छात्र हिंदी और अंग्रेजी शब्दों को रोमन लिपि में मिलाकर लिख रहे हैं. छोटे सवालों के जवाब बेहद संक्षिप्त और अधूरे हैं, जबकि लंबे सवालों में एक ही बात को घुमा-फिराकर लिखा गया है. कुछ आंसर शीट्स में पर्याप्त सामग्री ही नहीं है, जिससे छात्रों की तैयारी और समझ दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

स्मार्टफोन की आदत ने कमजोर की लेखन क्षमता

शिक्षकों का मानना है कि लगातार मोबाइल कीबोर्ड इस्तेमाल करने से छात्रों का पेन और पेपर से अभ्यास कम हो गया है. इसका असर हैंडराइटिंग और लिखने की गति पर पड़ा है. कई कॉपियों में अक्षर इतने अस्पष्ट हैं कि पढ़ना मुश्किल हो रहा है. स्पेलिंग न आने पर छात्र शब्दों को रोमन में लिखकर काम चलाने की कोशिश कर रहे हैं.

प्रैक्टिस की कमी आई सामने

मूल्यांकन के दौरान यह भी देखा गया कि छात्र आकृति या चार्ट तो बना देते हैं, लेकिन उनकी व्याख्या दो-तीन पंक्तियों में ही सीमित रहती है. इससे विषय की गहरी समझ का अभाव साफ झलकता है. शिक्षकों के अनुसार नियमित लेखन अभ्यास की कमी इसका बड़ा कारण है, जो परीक्षा परिणामों को भी प्रभावित कर सकता है.

शिक्षकों ने जताई गहरी चिंता

एमबीपीजी कॉलेज में जनवरी से मूल्यांकन कार्य जारी है, जहां करीब 62 हजार छात्रों की आंसर शीट्स जांची जा रही हैं. विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार जनवरी के अंत या फरवरी के पहले सप्ताह तक मूल्यांकन पूरा कर लिया जाएगा और फरवरी में परिणाम घोषित होंगे. शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो भविष्य में समस्या और गंभीर हो सकती है.