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घिसे टायरों से काम चला रहे हैं आप? इंजन और जेब दोनों को कर देगी खोखला, हो जाएं सावधान

घिसे हुए टायर सिर्फ गाड़ी की सजावट नहीं, बल्कि सुरक्षा और परफॉर्मेंस का आधार हैं. जब इनकी ग्रिप खत्म हो जाती है तो ब्रेकिंग डिस्टेंस बढ़ता है, इंजन पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और माइलेज घट जाता है.

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Edited By: Reepu Kumari
घिसे टायरों से काम चला रहे हैं आप? इंजन और जेब दोनों को कर देगी खोखला, हो जाएं सावधान
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: कार चलाना सिर्फ एक सफर नहीं, बल्कि परिवार की जिम्मेदारी भी है. ज्यादातर लोग इंजन की आवाज सुनकर या फीचर्स की शिकायत करके गाड़ी की हालत का पता लगा लेते हैं, लेकिन टायरों की स्थिति को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि टायर ही वह हिस्सा है जो गाड़ी को सड़क से जोड़ता है. घिसे हुए टायर न सिर्फ ड्राइविंग को खतरनाक बनाते हैं बल्कि इंजन और ईंधन खपत पर भी बुरा असर डालते हैं.

आजकल व्यस्त जीवन में लोग टायर चेक करना भूल जाते हैं. नतीजा यह होता है कि बिना किसी चेतावनी के अचानक समस्या सामने आ जाती है. घिसे टायरों की वजह से गाड़ी की परफॉर्मेंस गिरती है और अनचाहे खर्चे बढ़ जाते हैं. इसलिए समय रहते इन संकेतों को समझना बेहद जरूरी है.

टायर की ग्रिप चली जाए तो क्या होता है

जब टायर पूरी तरह घिस जाते हैं तो उनकी सतह चिकनी हो जाती है. सड़क पर पकड़ बनाना मुश्किल हो जाता है. खासकर बारिश में तो फिसलन इतनी बढ़ जाती है कि गाड़ी काबू से बाहर हो सकती है. इस स्थिति में इंजन को गति बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. रोलिंग रेजिस्टेंस बढ़ने से ईंधन की खपत भी बढ़ जाती है. यानी एक ही समस्या माइलेज और इंजन दोनों को नुकसान पहुंचाती है.

इंजन और ट्रांसमिशन पर पड़ने वाला दबाव

घिसे टायरों की वजह से पहिए सड़क पर ठीक से घूम नहीं पाते. इंजन को ज्यादा आरपीएम पर चलाना पड़ता है. इससे इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब होते हैं और गियरबॉक्स पर भी दबाव बढ़ता है. कई बार ओवरहीटिंग की शिकायत शुरू हो जाती है. लंबे समय तक ऐसा चलने से महंगे रिपेयर का खर्चा आ सकता है.

हाइड्रोप्लेनिंग का खतरनाक खेल

बारिश के मौसम में घिसे टायर सबसे बड़ा खतरा बन जाते हैं. पानी की पतली परत टायर और सड़क के बीच फंस जाती है. ब्रेक और स्टीयरिंग दोनों बेकार हो जाते हैं. इस हाइड्रोप्लेनिंग की स्थिति में एक्सीडेंट का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. अच्छी कंडीशन वाले टायर इस समस्या से काफी हद तक बचाते हैं.

ब्रेकिंग और सस्पेंशन पर बुरा असर

घिसे टायरों में ब्रेक लगाने पर गाड़ी ज्यादा दूर तक फिसलती है. वाइब्रेशन बढ़ जाता है जो पूरे वाहन को हिलाता है. सस्पेंशन सिस्टम जल्दी घिसता है. इससे सवारी की आरामदायक अनुभूति भी खत्म हो जाती है. छोटी-छोटी खामियां धीरे-धीरे बड़ी समस्या बन जाती हैं.

कब बदलें टायर, यह जानना जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार टायर की थ्रेड गहराई 1.6 मिलीमीटर से कम होने पर उसे तुरंत बदल देना चाहिए. नियमित रूप से प्रेशर चेक करें और सड़क पर चलते समय किसी भी असामान्य आवाज या वाइब्रेशन पर ध्यान दें. समय पर टायर बदलने से न सिर्फ सुरक्षा बढ़ती है बल्कि इंजन की लाइफ भी लंबी होती है और माइलेज भी बेहतर रहता है.