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रात होते ही जंगल में शुरू हो जाती है पेड़ों की 'गुप्त बातचीत'! विज्ञान ने खोला हैरान करने वाला राज

रात में शांत दिखने वाले जंगल के भीतर एक अनोखी प्रक्रिया लगातार चलती रहती है. वैज्ञानिकों के अनुसार पेड़ इंसानों की तरह बोलते नहीं हैं.

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Edited By: Reepu Kumari
रात होते ही जंगल में शुरू हो जाती है पेड़ों की 'गुप्त बातचीत'! विज्ञान ने खोला हैरान करने वाला राज
Courtesy: ChatGpt

नई दिल्ली: दिन ढलने के बाद जंगल भले ही पूरी तरह शांत दिखाई दें, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती के नीचे गतिविधियां जारी रहती हैं. आधुनिक शोध बताते हैं कि पेड़ बिना आवाज निकाले भी एक-दूसरे तक जरूरी संकेत पहुंचाने की क्षमता रखते हैं. यह प्रक्रिया किसी जादू से नहीं, बल्कि प्रकृति की बेहद जटिल और वैज्ञानिक व्यवस्था के माध्यम से संचालित होती है.

पेड़ों के बीच होने वाला यह संपर्क इंसानों की बातचीत जैसा नहीं होता. वे न तो शब्दों का प्रयोग करते हैं और न ही ध्वनि का. इसके बजाय उनकी जड़ों से जुड़ा विशेष फंगल नेटवर्क और वातावरण में छोड़े जाने वाले रासायनिक संकेत सूचना पहुंचाने का काम करते हैं. इसी वजह से वैज्ञानिक इस व्यवस्था को प्रकृति का अद्भुत संचार तंत्र मानते हैं.

जड़ों के नीचे फैला है प्राकृतिक नेटवर्क

वैज्ञानिकों के अनुसार अधिकांश पेड़ भूमिगत फंगल नेटवर्क से जुड़े रहते हैं. इसे माइकोरिजल नेटवर्क या 'वुड वाइड वेब' कहा जाता है. यह नेटवर्क अलग-अलग पेड़ों की जड़ों को जोड़ता है और उनके बीच संसाधनों तथा संकेतों के आदान-प्रदान में मदद करता है. यही कारण है कि जंगल के कई पेड़ एक-दूसरे से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े रहते हैं.

आवाज नहीं, संकेतों से होती है जानकारी साझा

पेड़ इंसानों की तरह बोलकर संवाद नहीं करते. शोध के मुताबिक वे रासायनिक संकेतों और जड़ों से जुड़े नेटवर्क के जरिए सूचनाएं साझा करते हैं. यह पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से होती है और पेड़ों के बीच समन्वय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे जैविक संचार प्रणाली का हिस्सा मानते हैं.

फंगल नेटवर्क कैसे करता है काम

भूमिगत फंगल नेटवर्क पेड़ों की जड़ों के साथ जुड़कर एक विस्तृत संरचना बनाता है. इसके माध्यम से विभिन्न पेड़ों के बीच संसाधनों और संकेतों का आदान-प्रदान संभव होता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह व्यवस्था जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में भी अहम योगदान देती है.

रात में भी जारी रहती हैं प्राकृतिक गतिविधियां

सूर्यास्त के बाद जंगल शांत जरूर दिखते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वहां सभी प्रक्रियाएं रुक जाती हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार भूमिगत नेटवर्क लगातार सक्रिय रहता है. यही कारण है कि पेड़ों के बीच संपर्क की प्रक्रिया दिन और रात दोनों समय बनी रह सकती है.

शोध ने बदली पेड़ों को देखने की सोच

पेड़ों के बीच संचार को लेकर हुए अध्ययनों ने प्रकृति को समझने का नया नजरिया दिया है. अब वैज्ञानिक मानते हैं कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि आपस में जुड़े जीवों का एक जटिल तंत्र है. हालांकि यह संवाद इंसानों की भाषा जैसा नहीं होता, बल्कि पूरी तरह प्राकृतिक और जैविक प्रक्रियाओं पर आधारित होता है.