नई दिल्ली: क्रिकेटर्स अपनी फिटनेस पर बहुत ध्यान देते हैं. उन्हें अपनी एक्टिविटीज को लगातार ट्रैक करना होता है. यही कारण है कि भारतीय क्रिकेटर्स लगातार कई तरह के एडवांस डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं. इन दिनों एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिनमें रोहित शर्मा, विराट कोहली, केएल राहुल और हार्दिक पांड्या की पीठ पर एक छोटी-सी डिवाइस लगी दिखाई दे रही है. अब लोगों का सवाल यह है कि आखिर यह डिवाइस क्या है और इसे क्यों लगाया जाता है.
कुछ खबरों के अनुसार, यह एक जीपीएस परफॉर्मेंस ट्रैकिंग यूनिट है. इसका इस्तेमाल प्लेयर्स मैदान पर गतिविधियों और प्रदर्शन से जुड़ा डाटा रिकॉर्ड करने के लिए करते हैं. इस डिवाइस को एक यूनिक पाउच में रखा जाता है. फिर प्लेयर्स की जर्सी या कंप्रेशन वेस्ट के ऊपरी हिस्से में, कंधों के बीच पीठ पर लगाया जाता है. प्लेयर जब मैदान पर ट्रेनिंग या प्रैक्टिस करते हैं, तब यह डिवाइस उनके हर मूवमेंट को ट्रैक करती है और सारा डाटा रिकॉर्ड करती है.
यह डिवाइस प्लेयर्स की हर एक्टिविटी को ट्रैक करता है. इसमें प्लेयर्स ने कितनी दूरी तय की है, कितनी तेज स्पीड से दौड़े हैं, क्या एक्टिविटी की हैं और ट्रेनिंग के दौरान बॉडी पर कितना लोड पड़ा है, जैसे डाटा को ये डिवाइस रिकॉर्ड करती है. कुछ सिस्टम हार्ट रेट जैसे फिटनेस डाटा को भी ट्रैक करने का काम करते हैं. इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कोच और सपोर्ट स्टाफ प्लेयर को ट्रेन करने में कितनी मेहनत कर रहे हैं.
Hey @grok, what’s this gadget that every Indian cricketer uses? 😱 https://t.co/eOHuJFKvkN
— Mukku (@Cric_Mukku) October 6, 2026
अगर सबसे बड़े फायदे की बात की जाए तो यह फिटनेस मैनेजमेंट होता है. डाटा के आधार पर टीम का सपोर्ट स्टाफ खिलाड़ियों की ट्रेनिंग की स्पीड तय करता है. अगर किसी प्लेयर पर लोड बहुत ज्यादा हो जाता है तो उसकी ट्रेनिंग में बदलाव किया जा सकता है. इससे शरीर पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को समझने और चोट के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है. इसी डाटा का इस्तेमाल खिलाड़ियों के लिए ट्रेनिंग, रिकवरी और फिटनेस प्लान तैयार करने में भी किया जाता है.
नहीं. GPS आधारित परफॉर्मेंस ट्रैकिंग तकनीक का इस्तेमाल दुनिया भर की कई प्रोफेशनल स्पोर्ट्स टीमों में किया जाता है. भारतीय क्रिकेट में भी ऐसी तकनीक का इस्तेमाल पहले से होता रहा है. इसके अलावा क्रिकेट में Catapult जैसी कंपनियों की तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाता है.