नई दिल्ली: आजकल इन्वर्टर AC खरीदते समय ज्यादातर लोग सिर्फ Inverter AC नाम देखकर समझ लेते हैं कि सब एक जैसे हैं. लेकिन असल में सिंगल इन्वर्टर AC और ड्यूल इन्वर्टर AC में काफी अंतर होता है. कूलिंग, बिजली की बचत, आवाज और लंबे समय तक चलने में दोनों अलग-अलग हैं. इन 8 अंतरों को जानकर ही AC खरीदना सही रहता है. यहां हम आपको इन 8 अंतरों के बारे में बता रहे हैं.
सिंगल इन्वर्टर AC में एक ही रोटरी कम्प्रेसर लगा होता है. जबकि ड्यूल इन्वर्टर AC में दो कम्प्रेसर (ट्विन रोटरी) होते हैं. इससे कूलिंग पर बेहतर कंट्रोल मिलता है.
ड्यूल इन्वर्टर AC कमरे को ज्यादा तेजी से ठंडा करता है, क्योंकि इसका कम्प्रेसर स्पीड को ज्यादा फ्लैक्सिबल बनाता है.सिंगल इन्वर्टर भी अच्छा काम करता है लेकिन थोड़ा धीमा होता है.
दोनों ही नॉन-इन्वर्टर AC से कम बिजली खाते हैं. लेकिन ड्यूल इन्वर्टर AC ज्यादा बचत करता है क्योंकि तापमान ज्यादा स्थिर रहता है और कम्प्रेसर कम बार चालू-बंद होता है.
ड्यूल इन्वर्टर AC कमरे का तापमान बहुत स्थिर रखता है. सिंगल इन्वर्टर में तापमान में थोड़ा-थोड़ा उतार-चढ़ाव हो सकता है.
ड्यूल इन्वर्टर AC बहुत कम आवाज करता है. कम्प्रेसर स्मूद चलता है, इसलिए वाइब्रेशन और शोर कम होता है. सिंगल इन्वर्टर AC में शोर थोड़ा ज्यादा हो सकता है.
ड्यूल इन्वर्टर AC ज्यादा टिकाऊ माना जाता है क्योंकि कम्प्रेसर पर कम दबाव पड़ता है. अगर रोजाना लंबे समय तक AC चलाते हैं तो ड्यूल इन्वर्टर बेहतर विकल्प है.
सिंगल इन्वर्टर AC सस्ता पड़ता है. ड्यूल इन्वर्टर AC की शुरुआती कीमत थोड़ी ज्यादा होती है.
अगर परिवार में AC पूरे दिन चलता है तो ड्यूल इन्वर्टर AC चुनें। कम बिजली बिल, कम आवाज और बेहतर कूलिंग मिलेगी. अगर बजट कम है और AC कभी-कभी ही चलता है तो सिंगल इन्वर्टर AC भी अच्छा काम करेगा.