दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियां तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर निवेश बढ़ा रही हैं. इसके साथ ही कर्मचारियों की संख्या में भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं. कुछ कंपनियां नए लोगों को नियुक्त कर रही हैं, जबकि कई संगठन लागत घटाने और एआई आधारित कामकाज को बढ़ावा देने के लिए छंटनी का रास्ता अपना रहे हैं.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विस्तार ने टेक इंडस्ट्री के काम करने के तरीके को तेजी से बदल दिया है. कई कंपनियों का मानना है कि एआई की मदद से कम कर्मचारियों के साथ भी बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है. इसी सोच के तहत पिछले एक वर्ष में कई बड़ी कंपनियों ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव किए हैं. कुछ उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि एआई से भविष्य में कई पारंपरिक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, जबकि दूसरी ओर नई तकनीकों से जुड़े नए अवसर भी पैदा होंगे. विश्व आर्थिक मंच का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक करोड़ों नौकरियां समाप्त होंगी, लेकिन उससे अधिक नए रोजगार भी सृजित किए जा सकते हैं.
गूगल की मूल कंपनी Alphabet ने पिछले एक वर्ष में अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई है. कंपनी के ताजा आंकड़ों के अनुसार जून 2025 से जून 2026 के बीच लगभग 11,830 नए कर्मचारी जुड़े और कुल संख्या 1,98,933 तक पहुंच गई. पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने बड़े स्तर पर छंटनी भी की थी, लेकिन अब एआई से जुड़े नए प्रोजेक्ट्स और कारोबार के विस्तार के कारण दोबारा नियुक्तियों में तेजी देखी जा रही है. खास तौर पर 2026 की दूसरी तिमाही में सबसे अधिक नई भर्तियां दर्ज की गईं.
Meta ने जून 2026 तक अपने कर्मचारियों की संख्या घटाकर 75,472 कर दी, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग एक प्रतिशत कम है. कंपनी ने हजारों कर्मचारियों को नई एआई परियोजनाओं में स्थानांतरित किया, जबकि कुछ कर्मचारियों की छंटनी भी की गई. वहीं Microsoft के पास जून 2026 तक करीब 2.23 लाख कर्मचारी रहे, जो एक वर्ष पहले की तुलना में लगभग 5,000 कम हैं. कंपनी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना और छंटनी के जरिए अपने कार्यबल का पुनर्गठन किया है. इसके बावजूद एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश जारी है.
टेक कंपनियों की रणनीति से साफ है कि एआई अब केवल नई तकनीक नहीं, बल्कि कारोबारी मॉडल का अहम हिस्सा बन चुका है. हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इससे रोजगार पूरी तरह घटेंगे या बढ़ेंगे. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि दोहराए जाने वाले कामों में एआई की भूमिका बढ़ेगी, जबकि रचनात्मक और तकनीकी कौशल वाले नए पदों की मांग भी बढ़ सकती है. फिलहाल कंपनियां दक्षता बढ़ाने और एआई आधारित विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं, जिससे आने वाले वर्षों में रोजगार का स्वरूप पहले से काफी अलग दिखाई दे सकता है.