देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने एमएसएमई और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बड़ी राहत देते हुए डीजल खरीद और भंडारण संबंधी नियमों में महत्वपूर्ण छूट दी है. हाल ही में पेट्रोल पंपों से डीजल खरीद पर लागू की गई सख्त सीमाओं के बीच राज्य सरकार ने छोटे उद्योगों को कंटेनर में 200 लीटर तक डीजल खरीदने और 2500 लीटर तक डीजल भंडारण की अनुमति प्रदान की है.
राज्य सरकार ने यह कदम उद्योगों की ओर से लगातार उठाई जा रही चिंताओं के बाद उठाया है. इससे पहले ईंधन के दुरुपयोग को रोकने और औद्योगिक उपयोग की निगरानी के लिए खाद्य विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया था.
27 मई को जारी आदेश के तहत देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर, टिहरी और पौड़ी समेत छह जिलों में पेट्रोल पंपों के निरीक्षण के निर्देश दिए गए थे. इस अभियान के चलते कई उद्योगों को डीजल की आपूर्ति में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था.
डीजल खरीद पर प्रतिबंधों के कारण कई छोटी औद्योगिक इकाइयों का संचालन प्रभावित होने लगा था. उद्योग संगठनों ने सरकार के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं और मांग की कि उत्पादन कार्य बाधित न हो, इसके लिए डीजल खरीद और भंडारण में व्यावहारिक व्यवस्था की जाए.
इसके बाद खाद्य आयुक्त बंशी लाल राणा ने सभी जिला पूर्ति अधिकारियों को निर्देश जारी किए. नए आदेश के अनुसार एमएसएमई और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को कंटेनरों में 200 लीटर तक डीजल उपलब्ध कराया जाएगा. इसके अलावा उन्हें 2500 लीटर तक डीजल स्टोर करने की अनुमति भी दी गई है.
सरकार के इस फैसले का उद्योग संगठनों ने स्वागत किया है. विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया है. उनका कहना है कि इस निर्णय से छोटे और मध्यम उद्योगों को राहत मिलेगी तथा उत्पादन गतिविधियां सुचारु रूप से जारी रह सकेंगी.
उद्योग प्रतिनिधियों ने खाद्य मंत्री रेखा आर्या, खाद्य आयुक्त बंशी लाल राणा और अन्य अधिकारियों को भी धन्यवाद दिया है. उनका मानना है कि सरकार ने उद्योगों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए समय पर समाधान प्रदान किया है. गौरतलब है कि राज्य सरकार ने औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं को पेट्रोल पंपों से सीधे बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल खरीदने पर रोक लगाई थी. ऐसे उपभोक्ताओं को थोक बिक्री केंद्रों से ईंधन लेने का निर्देश दिया गया है. यह व्यवस्था अधिकतम 90 दिनों तक लागू रहेगी.
सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य ईंधन के दुरुपयोग को रोकना, आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाना और आवश्यक क्षेत्रों को पर्याप्त ईंधन उपलब्ध कराना है. नई छूट से उद्योगों और प्रशासन के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.