नई दिल्ली: लोकसभा में सरकार ने जानकारी दी कि देश में 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक सकल आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि पिछले पांच आकलन वर्षों में इस श्रेणी के आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
सरकार के अनुसार आकलन वर्ष 2025-26 में 576 लोगों ने अपनी आयकर रिटर्न में 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक की सकल आय घोषित की. यह संख्या आकलन वर्ष 2021-22 में केवल 142 थी. इसके बाद 2022-23 में यह बढ़कर 301, वर्ष 2023-24 में 284 और वर्ष 2024-25 में 415 रही. संसद में दिए गए इस आंकड़े से स्पष्ट है कि देश में अत्यधिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है.
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्पष्ट किया कि आयकर अधिनियम 2025 या पहले लागू आयकर अधिनियम 1961 में 'बिलियनेयर' शब्द की कोई वैधानिक परिभाषा नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार केवल उन लोगों का रिकॉर्ड रखती है, जिन्होंने आयकर रिटर्न में 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक की सकल आय घोषित की है. साथ ही उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2016 से संपत्ति कर कानून समाप्त होने के बाद सरकार करदाताओं की कुल संपत्ति का अलग से कोई आंकड़ा नहीं रखती.
सरकार ने संसद में यह भी कहा कि आर्थिक समावेशन से जुड़े कई संकेतकों में सुधार देखने को मिला है. वर्ष 2023-24 के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गिनी गुणांक में कमी आई है, जो आय असमानता घटने का संकेत माना जाता है. वहीं 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की बेरोजगारी दर 2022 के 3.6 प्रतिशत से घटकर 2025 में 3.1 प्रतिशत हो गई है. सरकार का कहना है कि प्रगतिशील कर व्यवस्था, रोजगार प्रोत्साहन, स्टार्टअप सहायता और सामाजिक कल्याण योजनाओं के जरिए समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है.