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कैसे ‘उत्तरांचल’ से ‘उत्तराखंड’ बनी देवभूमि? आज राज्य के 25 साल हुए पूरे, जानें इतिहास और महत्व

उत्तराखंड ने अपने गठन के 25 वर्ष पूरे किए हैं. 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर बना यह ‘देवभूमि’ राज्य पहले ‘उत्तरांचल’ कहलाता था और भारत का 27वां राज्य बना.

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Edited By: Princy Sharma
Uttarakhand foundation day 2025 India Daily
Courtesy: X @BrijLal_IPS

नई दिल्ली: उत्तराखंड अपने गठन के 25 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं. उन्होंने पर्यटन, शिक्षा और उद्योग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्तराखंड की उत्कृष्ट प्रगति की सराहना की. प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे यह राज्य अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखते हुए विकास का एक उदाहरण बन गया है.

'देवभूमि' के नाम से प्रसिद्ध, उत्तराखंड की यात्रा विकास और भक्ति दोनों को दर्शाती है. राज्य का आधिकारिक गठन 9 नवंबर, 2000 को हुआ था, जब इसे उत्तर प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों, जिसमें गढ़वाल और कुमाऊं मंडल शामिल थे से अलग किया गया था. उस समय, इसका नाम 'उत्तरांचल' रखा गया और यह भारत का 27वां राज्य बना.

क्या है 'उत्तराखंड' नाम का अर्थ?

हालांकि, इस क्षेत्र के लोगों का हमेशा से 'उत्तराखंड' नाम के साथ एक गहरा भावनात्मक और ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है, क्योंकि उनका मानना ​​था कि यही उनकी असली पहचान है. उत्तराखंड शब्द संस्कृत से आया है उत्तर का अर्थ है 'उत्तर' और खंड का अर्थ है 'भाग' या 'क्षेत्र', इसलिए 'उत्तरी भूमि'. इस नाम का उल्लेख प्राचीन हिंदू ग्रंथों और पुराणों में मिलता है, जो केदारखंड (गढ़वाल) और मानसखंड (कुमाऊं) सहित मध्य हिमालयी क्षेत्र का वर्णन करते हैं.

राज्य को क्यों कहा जाता है 'देवभूमि'? 

यह क्षेत्र बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे पवित्र तीर्थस्थलों का घर है, जो इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक बनाते हैं सच्ची देवभूमि या देवताओं की भूमि. जब राज्य का गठन हुआ, तो कई स्थानीय लोगों को लगा कि उत्तरांचल नाम राजनीति से प्रेरित है और उनकी सांस्कृतिक जड़ों से कटा हुआ है. गढ़वाल और कुमाऊं के लोग, कार्यकर्ता और स्थानीय नेता पारंपरिक नाम उत्तराखंड की बहाली की मांग में एकजुट हुए. 

क्या है कारण?

उनकी मांग केवल नाम की नहीं, बल्कि उनकी प्राचीन पहचान, परंपराओं और इतिहास के सम्मान की थी. इस जनभावना को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2006 में इस बदलाव को मंजूरी दी और 1 जनवरी, 2007 को राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया. नाम परिवर्तन गढ़वाल और कुमाऊं के बीच एकता का भी प्रतीक था, ये दो क्षेत्र, अलग-अलग भाषाओं और रीति-रिवाजों के बावजूद, एक साझा हिमालयी विरासत साझा करते हैं.