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सूखे का साया! 2015 जैसा खौफनाक मंजर लौटाएगा अलनीनो? यूपी के किसानों की रातों की उड़ी नींद

यूपी में मानसून की देरी और अलनीनो के असर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इस बार 2015 जैसी सूखे की स्थिति बन सकती है, जिससे फसलों और महंगाई पर बड़ा असर पड़ सकता है.

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Edited By: Reepu Kumari
सूखे का साया! 2015 जैसा खौफनाक मंजर लौटाएगा अलनीनो? यूपी के किसानों की रातों की उड़ी नींद
Courtesy: ChatGpt

उत्तर प्रदेश में इस बार मानसून ने जिस तरह की देरी दिखाई है, उसने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. आम तौर पर मध्य जून तक प्रदेश में मानसून सक्रिय हो जाता है, लेकिन इस साल अलनीनो के असर के चलते बारिश सामान्य से काफी कम रहने की संभावना जताई जा रही है. जून महीने में ही 50 फीसदी तक कम बारिश दर्ज हो सकती है. सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि सिर्फ जून ही नहीं, बल्कि जुलाई से सितंबर के बीच भी बारिश सामान्य से कम रहने के आसार बन रहे हैं. मौसम वैज्ञानिक की मानें तो इस साल बारिश का आंकड़ा 90 फीसदी से भी नीचे जा सकता है, जिसकी वजह से प्रदेश के कई हिस्सों में सूखे जैसी हालत खड़ी हो सकती है.

2015 की तस्वीर फिर डराने लगी

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार के हालात 2015 की याद ताजा कर रहे हैं. उस साल जून से सितंबर के बीच देशभर में सामान्य से महज 86 से 91 फीसदी ही बारिश हुई थी, जिसका सीधा असर खरीफ की फसलों पर पड़ा था. धान, मक्का जैसी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई थीं और तालाबों-पोखरों में पानी कम होने से सिंचाई व्यवस्था भी चरमरा गई थी.

देश के ज्यादातर जिलों में बारिश की कमी

मौजूदा हालात की बात करें तो देश के 50 से 60 फीसदी जिलों में बारिश सामान्य से कम हुई है. 15 जून तक के आंकड़ों पर गौर करें तो 703 जिलों में से सिर्फ 103 जिलों में ही सामान्य बारिश दर्ज की गई. महाराष्ट्र जैसे राज्य में भी यही पैटर्न देखने को मिला है, जिससे किसानों की बेचैनी और बढ़ गई है.

अलनीनो की ताकत साल दर साल अलग रही

अलनीनो के असर का इतिहास देखें तो 2015 में इसका प्रभाव सबसे ज्यादा था, जिसके चलते बारिश सिमट कर 86 फीसदी पर आ गई थी. इसके बाद 2018 में अलनीनो कुछ कमजोर पड़ा और बारिश 90 फीसदी से ऊपर रही, जबकि 2023 में इसका असर मध्यम रहा और बारिश का आंकड़ा 94 फीसदी से अधिक दर्ज किया गया.

टमाटर से धान तक, हर फसल पर खतरा

जून की बारिश खरीफ की फसलों के लिए बेहद अहम मानी जाती है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक टमाटर, लौकी, भिंडी जैसी सब्जियों के साथ-साथ अरहर, मूंगफली और धान की बुवाई पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा. इन फसलों के दाम बढ़ने से आम आदमी की रसोई का बजट गड़बड़ा सकता है. इसी बीच मौसम विभाग ने शुक्रवार को कई इलाकों में भीषण गर्मी और लू का अलर्ट जारी किया, जबकि बांदा देश का सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया.