नई दिल्ली: आज हरियाली अमावस्या है. सावन महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है. हिंदू धर्म में इस दिन को प्रकृति, पितरों और भगवान शिव को समर्पित माना गया है. इस दिन स्नान, दान, पौधे लगाना और पितरों का तर्पण करना बहुत पुण्य का काम माना जाता है. सावन का पूरा महीना प्रकृति की हरियाली और शिव भक्ति से भरा होता है.
इस बीच आने वाली अमावस्या को पर्यावरण और इंसान के रिश्ते का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और प्रकृति की सेवा करने से देवी-देवताओं के साथ पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है. चलिए जानते हैं स्नान-दान का शुभ मुहूर्त.
हरियाली अमावस्या की तिथि 12 अगस्त को रात 1 बजकर 52 मिनट पर शुरू हुई थी और रात 11 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी.
स्नान और दान का शुभ समय सुबह 4 बजकर 23 मिनट से 5 बजकर 6 मिनट तक है.
इस दिन पौधा लगाना बहुत शुभ माना जाता है. पीपल, बरगद, नीम, आंवला, तुलसी या बेल का पौधा लगाने से देवताओं का वास होता है और अक्षय पुण्य मिलता है.
यह दिन पितरों की शांति के लिए भी खास है. पवित्र नदी में स्नान के बाद तर्पण और पिंडदान करने से पितर प्रसन्न होते हैं. परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.
सावन की अमावस्या होने के कारण भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. सुहागिन महिलाएं अपने सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस दिन व्रत भी रखती हैं.
ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें. घर पर भी गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं.
सूर्य देव को अर्घ्य दें. पितरों के लिए जल, तिल और फूल अर्पित करके तर्पण करें.
भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत चढ़ाएं. ॐ नमः शिवाय का जाप करें.
पूजा के बाद कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं. गरीबों को अन्न, कपड़े या फल दान करें.
हरियाली अमावस्या प्रकृति की रक्षा और पितरों के प्रति कृतज्ञता का दिन है. सरल तरीके से पूजा करके और पौधा लगाकर इस दिन का पुण्य कमाया जा सकता है. सच्ची श्रद्धा से किया गया काम सबसे बड़ा फल देता है.