उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए संपत्ति का ब्योरा न देना अब भारी पड़ सकता है. मानव संपदा पोर्टल पर निर्धारित समय के भीतर चल-अचल संपत्ति की जानकारी अपलोड नहीं करने वाले हजारों कर्मचारियों के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. पहले ही इन कर्मचारियों का वेतन कई महीनों से रुका हुआ है और अब विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी तेज होने जा रही है.
कार्मिक विभाग की ओर से जारी नए निर्देशों में सभी विभागाध्यक्षों को स्पष्ट कहा गया है कि वे अपने-अपने विभाग में ऐसे कर्मचारियों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करें. साथ ही कार्रवाई की रिपोर्ट शासन को भेजी जाए, ताकि लंबित मामलों का निस्तारण किया जा सके. इस कदम से उन कर्मचारियों पर दबाव बढ़ेगा जिन्होंने अब तक संपत्ति का विवरण दर्ज नहीं कराया है.
प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी हैं जिन्होंने मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा दर्ज नहीं किया. नियमों का पालन न करने के कारण उनका वेतन मार्च से रोका गया हुआ है. अब शासन स्तर पर इस मामले की समीक्षा के बाद विभागों को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में संबंधित कर्मचारियों को विभागीय नोटिस और अन्य प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, करीब 5,000 कर्मचारियों का वेतन पिछले चार महीने से अटका हुआ है. अधिकारियों का कहना है कि संपत्ति का विवरण उपलब्ध होने और विभागीय औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही लंबित वेतन जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी. इस वजह से कई कर्मचारियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
कार्मिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, संपत्ति का विवरण अपलोड न करने वालों में अधिकांश कर्मचारी समूह ग और समूह घ श्रेणी से जुड़े हैं. विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे मामलों का जल्द निस्तारण करें और कार्रवाई की सूचना शासन को उपलब्ध कराएं, ताकि आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी हो सके.
राज्य कर्मचारियों को 31 जनवरी 2026 तक संपत्ति का ब्योरा देना था. तय समयसीमा के बाद भी 47,816 कर्मचारियों ने जानकारी दर्ज नहीं की थी. इसके बाद 10 मार्च 2026 तक अंतिम अवसर दिया गया, लेकिन बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने इसका भी पालन नहीं किया. नियमों के तहत ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई, पदोन्नति पर रोक, एसीपी लाभ से वंचित करना और विदेश यात्रा या प्रतिनियुक्ति के लिए विजिलेंस क्लियरेंस रोकने जैसे प्रावधान लागू किए जा सकते हैं.