menu-icon
India Daily

वृंदावन यमुना रिवर फ्रंट निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की फिर रोक, केंद्र और राज्य सरकार से छह सप्ताह में मांगी रिपोर्ट

वृंदावन में यमुना नदी पर 177 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे रिवर फ्रंट परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य से यमुना का प्राकृतिक स्वरूप और जल प्रवाह प्रभावित हो रहा है. अदालत ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

shanu
Edited By: Shanu Sharma
वृंदावन यमुना रिवर फ्रंट निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की फिर रोक, केंद्र और राज्य सरकार से छह सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
Courtesy: AI

वृंदावन में यमुना नदी के किनारे विकसित किए जा रहे रिवर फ्रंट परियोजना का निर्माण कार्य एक बार फिर रुक गया है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस परियोजना पर अंतरिम रोक लगाते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. यह परियोजना पहले भी करीब दस वर्षों तक कानूनी विवाद के कारण ठप रही थी और इसी वर्ष अप्रैल में दोबारा शुरू हुई थी.

ब्रज वृंदावन देवालय समिति ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया कि रिवर फ्रंट का निर्माण यमुना नदी के भीतर काफी आगे तक किया जा रहा है. समिति का कहना है कि इससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित होगा, जल प्रवाह बाधित होगा और भविष्य में पर्यावरणीय संतुलन पर भी असर पड़ सकता है. याचिका में यह भी कहा गया कि यमुना की मूल पहचान और वृंदावन की धार्मिक तथा सांस्कृतिक विरासत पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

परियोजना में आठ घाटों का विकास प्रस्तावित

करीब 177 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत वृंदावन के आठ प्रमुख घाटों का विकास किया जाना है. इनमें बांकेबिहारी मंदिर के आसपास स्थित घाट भी शामिल हैं. योजना के अनुसार घाटों का सुंदरीकरण, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था, पर्यटकों के बैठने की सुविधा, लाल पत्थरों से सीढ़ियों का निर्माण तथा अन्य सौंदर्यीकरण कार्य किए जा रहे हैं. इसके साथ ही यमुना में गंदे पानी के प्रवाह को रोकने के लिए नालों की टेपिंग का कार्य भी पूरा किया जा चुका है.

रिवर फ्रंट परियोजना को लेकर लगभग दस वर्ष पहले भी न्यायालय में चुनौती दी गई थी. उस समय शिकायत के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया था. लंबे समय तक मामला लंबित रहने के बाद उच्च न्यायालय के आदेश के आधार पर अप्रैल 2026 में परियोजना का काम फिर से शुरू किया गया था. हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद निर्माण एक बार फिर रुक गया है.

समिति की ओर से अधिवक्ता शुभम उपाध्याय ने बताया कि जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान निर्माण कार्य तत्काल रोकने का निर्देश दिया और केंद्र व राज्य सरकार से छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है.