जिम्बाब्वे दौरे पर मौजूद भारतीय टीम के सामने जीत से ज्यादा खिलाड़ियों की फिटनेस चर्चा का विषय बन गई है. हालिया टी20 और वनडे सीरीज में मिली हार के बाद कप्तान शुभमन गिल ने बढ़ती चोटों पर चिंता जताई है. उनकी प्रतिक्रिया के बाद खिलाड़ियों की फिटनेस व्यवस्था, मेडिकल निगरानी और टीम मैनेजमेंट के बीच समन्वय को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. रिपोर्टों के अनुसार कई स्तरों पर सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है.
कप्तान शुभमन गिल ने माना कि लगातार चोटिल हो रहे खिलाड़ियों का असर टीम के प्रदर्शन पर साफ दिखाई दे रहा है. उनका मानना है कि खिलाड़ियों की फिटनेस और वर्कलोड को संभालने वाली व्यवस्था में कहीं न कहीं कमी आ रही है. इससे टीम को लगातार बदलाव करने पड़ रहे हैं, जिसका असर मैदान पर भी दिख रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार BCCI से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और टीम मैनेजमेंट के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है. नितिन पटेल के जाने के बाद मेडिकल विभाग को नया प्रमुख नहीं मिला है. ऐसे में खिलाड़ियों की फिटनेस से जुड़े फैसलों में समन्वय की कमी महसूस की जा रही है.
सूत्रों के अनुसार हाल के समय में कई खिलाड़ियों को हैमस्ट्रिंग की चोट लगी है. इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या खिलाड़ी पूरी तरह फिट हुए बिना मैदान में उतरे हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि साल 2023 में बने मानक संचालन नियमों में अब तक बदलाव नहीं किया गया है, जबकि खेल की जरूरतें लगातार बदल रही हैं.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ खिलाड़ियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी का दबाव बढ़ा है. खासकर तेज गेंदबाजी करने वाले खिलाड़ियों के वर्कलोड को लेकर चिंता जताई गई है. लगातार क्रिकेट और सीमित आराम के कारण चोट का जोखिम बढ़ रहा है. ऐसे में खिलाड़ियों की निगरानी और रिकवरी प्रक्रिया को और मजबूत बनाने की जरूरत बताई जा रही है.
सूत्रों के मुताबिक कई दौरों पर मेडिकल टीम खिलाड़ियों के साथ नहीं जाती, जिससे समय पर जानकारी साझा करने में दिक्कत आती है. विशेषज्ञों का मानना है कि फिटनेस, रिहैबिलिटेशन और वर्कलोड को लेकर CoE, मेडिकल स्टाफ और टीम मैनेजमेंट के बीच लगातार संवाद होना जरूरी है. इससे खिलाड़ियों की चोटों को कम करने और टीम को मजबूत बनाए रखने में मदद मिल सकती है.