menu-icon
India Daily

भगवान के नाम कर दी घर, जमीन समेत करोड़ों की संपत्ति; त्याग और श्रद्धा की मिसाल बना राजस्थान का किसान

राजस्थान के डूंगरपुर के किसान अमरजी गौतम पाटीदार ने करीब 10 करोड़ रुपये मूल्य की 10.15 बीघा जमीन भगवान सांवलिया सेठ को दान कर दी. वर्ष 2016 में लिया गया उनका संकल्प 10 साल बाद पूरा हुआ.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
भगवान के नाम कर दी घर, जमीन समेत करोड़ों की संपत्ति; त्याग और श्रद्धा की मिसाल बना राजस्थान का किसान
Courtesy: Chatgpt (Representative image)

चित्तौड़गढ़: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर में आस्था और समर्पण की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली है. डूंगरपुर जिले के किसान अमरजी गौतम पाटीदार ने अपनी करीब 10 करोड़ रुपये मूल्य की पूरी संपत्ति भगवान सांवलिया सेठ को दान कर दी. वर्ष 2016 में लिया गया उनका संकल्प करीब 10 साल बाद पूरा हुआ. 

इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए 100 से अधिक बार सांवलियाजी और चित्तौड़गढ़ के चक्कर लगाए. अब उनकी इच्छा है कि दान की गई जमीन पर एक भव्य गोशाला का निर्माण कराया जाए. डूंगरपुर जिले की आसपुर तहसील के खेड़ा सामोर गांव निवासी अमरजी गौतम पाटीदार साधारण किसान हैं. 

कब लिया संकल्प?

उनके माता पिता का निधन हो चुका है और वे अकेले रहते हैं. उन्होंने वर्ष 2016 में अपनी पूरी जमीन और मकान भगवान सांवलिया सेठ को समर्पित करने का संकल्प लिया था. हालांकि जमीन पर ऋण, अलग अलग खातों में दर्ज भूमि और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण उनका संकल्प वर्षों तक पूरा नहीं हो सका.

कितना किया दान?

लगातार प्रयासों के बाद मंदिर प्रशासन, स्थानीय लोगों और शुभचिंतकों के सहयोग से उनकी 10.15 बीघा जमीन भगवान सांवलिया सेठ के नाम रजिस्टर्ड कर दी गई. इस संपत्ति की अनुमानित कीमत करीब 10 करोड़ रुपये बताई जा रही है. इस तरह वर्षों की मेहनत और इंतजार के बाद उनका संकल्प पूरा हुआ.

दान की प्रक्रिया को पूरा कराने में कई लोगों ने सहयोग किया. जमीन का कर्ज चुकाने और जरूरी औपचारिकताएं पूरी कराने में पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी गिरिजा मैडम, भरत रावल, केवलजी और कुवैत में रहने वाले देवीलाल सहित कई लोगों ने आर्थिक मदद की. वहीं अधिवक्ता वालजी पाटीदार ने बिना किसी शुल्क के रजिस्ट्री की पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी कराई.

अमरजी पाटीदार क्या है कहना?

अमरजी पाटीदार का कहना है कि उनके खेत में लगे करीब 30 आम के पेड़ों के फल भी कभी बेचे नहीं जाते. उनकी इच्छा है कि दान की गई जमीन पर भविष्य में एक भव्य गोशाला बनाई जाए, जिससे गौसेवा और समाज सेवा का कार्य हो सके. उन्होंने यह भी बताया कि अब वे अपनी माता के करीब एक किलो चांदी के आभूषण भी भगवान सांवलिया सेठ को अर्पित करने की तैयारी कर रहे हैं.

श्री सांवलिया मंदिर मंडल के प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र सिंह ने अमरजी पाटीदार के इस दान को आस्था, त्याग और समर्पण की अनूठी मिसाल बताया. उनकी कहानी पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बनी हुई है और कई लोग उन्हें श्रद्धा और निस्वार्थ भावना के कारण कलयुग का सुदामा कहकर संबोधित कर रहे हैं.