जयपुर: राजस्थान में वन स्टेट, वन इलेक्शन के तहत नगरीय निकाय चुनाव का पहला चरण आज शुरू हो गया है. प्रदेश के 39 जिलों में 162 नगरीय निकायों के 5,393 वार्डों के लिए मतदान हो रहा है. इनमें 4 नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगर पालिकाएं शामिल हैं. कुल 57,52,278 मतदाता 20,623 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे.
मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष कराने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. कई बूथों पर सीसीटीवी और वेबकास्टिंग के जरिए निगरानी की जा रही है.
पहले चरण में अलवर, भरतपुर, बीकानेर और भीलवाड़ा नगर निगम के वार्डों में भी मतदान हो रहा है. वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों के प्रमुख नगर निगमों में चुनाव दूसरे चरण में होंगे. हालांकि जयपुर जिले की चौमूं, बगरू, शाहपुरा, चाकसू समेत 18 अन्य निकायों में पहले चरण में ही वोट डाले जा रहे हैं. 27 नगर परिषदों और 131 नगर पालिकाओं में भी पार्षद पद के लिए मुकाबला है.
इन चुनावों को राजस्थान की बीजेपी सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है. दिसंबर 2023 में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार पहली बार इतने बड़े स्तर पर शहरी मतदाताओं के बीच अपनी नीतियों और कामकाज का असर परख रही है. बीजेपी ने वन स्टेट, वन इलेक्शन की व्यवस्था को आगे बढ़ाया है, इसलिए चुनावी नतीजों को सरकार के कामकाज से जोड़कर देखा जा सकता है.
बीजेपी के सामने अपने शहरी वोट बैंक को बचाए रखने की चुनौती है. बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर और भरतपुर जैसे शहरों में पार्टी की मजबूत पकड़ रही है. इस बार बीजेपी ने कई पुराने पार्षदों के टिकट काटकर नए चेहरों को मौका दिया है. ऐसे में टिकट से नाराज नेताओं और निर्दलीय उम्मीदवारों को संभालना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है. भितरघात रोकना भी संगठन के सामने अहम सवाल है.
कांग्रेस के लिए भी ये चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं. विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद पार्टी के पास शहरी इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका है. कांग्रेस ने सफाई, सड़क, बिजली और स्थानीय प्रशासन से जुड़ी समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बनाया है. प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में पार्टी ने सरकार को घेरने की कोशिश की है.