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प्रसादी के आयोजन पर पंचायत का फरमान, 1.51 लाख जुर्माना नहीं दिया तो परिवार का हुक्का-पानी बंद

राजस्थान के गोगुंदा क्षेत्र में सामाजिक बहिष्कार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. मंदिर में प्रसादी का आयोजन करने को लेकर एक परिवार पर पंचायत ने कथित तौर पर 1.51 लाख रुपये का जुर्माना लगाया.

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Edited By: Shanu Sharma
प्रसादी के आयोजन पर पंचायत का फरमान, 1.51 लाख जुर्माना नहीं दिया तो परिवार का हुक्का-पानी बंद
Courtesy: Pinterest

गोगुंदा क्षेत्र के भूताला गांव निवासी गणेश सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 24 मई को उनके परिवार की ओर से गांव के मंदिर में प्रसादी का आयोजन किया गया था. आयोजन के बाद कुछ ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जताई. इसके अगले दिन पंचायत बुलाई गई, जिसमें परिवार पर 1 लाख 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने का आरोप है.

परिवार ने आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई. इसके बाद पंचायत की ओर से कथित तौर पर परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला सुनाया गया.

बातचीत और मेल-जोल पर भी रोक का आरोप

पीड़ित परिवार का आरोप है कि पंचायत के फैसले के बाद गांव के लोगों को उनसे बातचीत और किसी तरह का सामाजिक संबंध नहीं रखने की हिदायत दी गई. परिवार की ओर से इस फैसले का विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है. शिकायत के मुताबिक, परिवार के सदस्यों के मंदिर और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर आने-जाने में भी बाधा खड़ी की गई. इससे परिवार के सामने सामाजिक और मानसिक परेशानी की स्थिति पैदा हो गई.

मामले में सबसे गंभीर आरोप 29 मई की घटना को लेकर लगाया गया है. परिवार के एक सदस्य की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए श्मशान ले जाते समय रास्ता रोकने का आरोप है. पीड़ित परिवार का कहना है कि इस मामले को लेकर उसने स्थानीय पुलिस से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत की, लेकिन शुरुआत में मामला दर्ज नहीं किया गया.

कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुआ मामला

पुलिस में कार्रवाई नहीं होने के बाद परिवार ने न्यायालय का रुख किया. एएसआई विनेश कुमार के अनुसार, न्यायालय के आदेश के बाद 3 सितंबर को पांच प्रमुख पंचों समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने आरोपों की जांच शुरू कर दी है. जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सामाजिक बहिष्कार, जुर्माने और रास्ता रोकने से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है.