Punjab Municipal Corporation Secretary Rules: पंजाब के नगर निगमों में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. राज्य सरकार ने कारपोरेशन सेक्रेटरी के पद तक पहुंचने के रास्ते को पूरी तरह से नया रूप दे दिया है. अब इस अहम पद पर पदोन्नति पाने के लिए कर्मचारियों को तय शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा, जो पहले की व्यवस्था से काफी अलग है. स्थानीय निकाय विभाग ने 28 सितंबर को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है, जिससे यह नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है. इस बदलाव का सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जो लंबे समय से कारपोरेशन सेक्रेटरी बनने की राह देख रहे थे. नए नियम में दो अलग-अलग कैडर के लिए अलग-अलग हिस्सेदारी तय की गई है.
नए नियम के तहत कारपोरेशन सेक्रेटरी के कुल पदों में से 90 फीसदी पद कारपोरेशन सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-2 के कर्मचारियों की पदोन्नति से भरे जाएंगे. हालांकि इसके लिए कर्मचारी का ग्रेजुएट होना अनिवार्य होगा और उसके पास संबंधित सेवा में कम से कम चार साल का अनुभव भी होना चाहिए. यह डिग्री किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या संस्थान से ही स्वीकार की जाएगी, तभी पदोन्नति का रास्ता खुलेगा.
बाकी बचे 10 फीसदी पद सुपरिंटेंडेंट सैनिटेशन कैडर के कर्मचारियों के लिए आरक्षित रखे गए हैं. इस श्रेणी में भी पदोन्नति पाने के लिए ग्रेजुएशन और चार साल का अनुभव जरूरी होगा. यानी अब चाहे कोई भी कर्मचारी किसी भी कैडर से क्यों न हो, कारपोरेशन सेक्रेटरी बनने के लिए दोनों को शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की एक जैसी शर्त पूरी करनी पड़ेगी.
यह पूरा संशोधन पंजाब म्यूनिसिपल कारपोरेशन सर्विसेज के 1978 में बनाए गए भर्ती और सेवा नियमों में किया गया है. सरकार ने इसके लिए नियमों के अपेंडिक्स-बी में जरूरी बदलाव किए हैं. यह संशोधन सरकारी गजट में प्रकाशित होते ही तुरंत प्रभावी हो गया है, जिससे अब भविष्य में होने वाली सभी पदोन्नतियां इसी नए फॉर्मूले के आधार पर होंगी.
स्थानीय निकाय विभाग के सचिव घनश्याम थोरी, आईएएस की ओर से जारी अधिसूचना में साफ कहा गया है कि यह बदलाव सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी मिलने के बाद ही किया गया है. यह संशोधन पंजाब म्यूनिसिपल कारपोरेशन एक्ट, 1976 के तहत सरकार को मिले अधिकारों के आधार पर लागू किया गया है, जिससे इसकी वैधानिक स्थिति पूरी तरह मजबूत है.