भोपाल: मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की है. भाजपा उम्मीदवार राजनीश अग्रवाल, तरुण चुघ और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं. यह स्थिति तब बनी जब कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन जांच प्रक्रिया के दौरान खारिज कर दिया गया.
राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 18 जून को प्रस्तावित था लेकिन नामांकन पत्रों की जांच के दौरान घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया. निर्वाचन अधिकारी ने भाजपा की ओर से उठाई गई आपत्ति को स्वीकार करते हुए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन अमान्य घोषित कर दिया. भाजपा का आरोप था कि उम्मीदवार ने अपने नामांकन पत्र में तेलंगाना में लंबित एक मामले का पूरा विवरण नहीं दिया था, जिससे नामांकन अधूरा माना गया.
Madhya Pradesh RS polls: All 3 BJP candidates, national general secretary Tarun Chugh, state secretary Rajneesh Agrawal and ex MP State Fisherman Welfare Board head Mahesh Kewat declared elected unopposed. @NewIndianXpress @santwana99 @jayanthjacob pic.twitter.com/eoxatDTXZC
— Anuraag Singh (@anuraag_niebpl) June 11, 2026
नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मैदान में भाजपा के तीन उम्मीदवार ही बचे. किसी अन्य उम्मीदवार के न रहने के कारण तीनों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया. बाद में मध्य प्रदेश विधानसभा परिसर में आयोजित प्रक्रिया के दौरान तीनों उम्मीदवारों को निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंपे गए.
इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. कांग्रेस ने नामांकन खारिज किए जाने के फैसले का कड़ा विरोध किया है. पार्टी का कहना है कि यह निर्णय नियमों के अनुरूप नहीं है और इसके पीछे राजनीतिक उद्देश्य हैं. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा ने तीसरी राज्यसभा सीट सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया.
कांग्रेस का दावा है कि यदि चुनाव होता तो मुकाबला रोचक हो सकता था और भाजपा को तीसरी सीट पर चुनौती मिलती. पार्टी नेताओं ने कहा कि नामांकन खारिज करने का फैसला लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है और इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी.
मामला अब न्यायिक स्तर पर पहुंच चुका है. मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है. वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में मामले को अत्यंत जरूरी बताते हुए शीघ्र सुनवाई की मांग की.
उन्होंने अदालत में दलील दी कि संबंधित मामले में केवल समन जारी हुआ था और अभी तक संज्ञान लेने जैसी स्थिति नहीं बनी थी. ऐसे में नामांकन खारिज करना उचित नहीं माना जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध कर लिया है. अब सभी की नजर अदालत के फैसले पर टिकी हुई है, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है.