भोपाल: मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण की लागत अब पहले की तुलना में अधिक होगी. लोक निर्माण विभाग (PWD) ने अप्रैल 2026 से सड़क निर्माण की नई मानक लागत लागू कर दी है. नई व्यवस्था के तहत सीमेंट कंक्रीट (CC) और डामर (अस्फाल्ट) दोनों तरह की सड़कों के निर्माण की दरों में बढ़ोतरी की गई है. सरकार का कहना है कि इससे सड़कों की गुणवत्ता, मजबूती और टिकाऊपन में सुधार होगा, जबकि परियोजनाओं का बजट भी एक समान मानकों के आधार पर तैयार किया जा सकेगा.
नई मानक लागत में केवल सड़क निर्माण का कुल खर्च ही तय नहीं किया गया है, बल्कि निर्माण के हर चरण की अलग-अलग लागत भी निर्धारित की गई है. इसमें अर्थवर्क, सबग्रेड, सीआरएम, डब्ल्यूएमएम, डीबीएम, बीसी, हार्ड शोल्डर, डीएलसी और पीक्यूसी जैसे कार्य शामिल हैं. इससे सभी परियोजनाओं में एक जैसी तकनीकी प्रक्रिया अपनाने और लागत का बेहतर आकलन करने में आसानी होगी.
PWD ने डामर सड़कों के लिए ट्रैफिक के आधार पर अलग-अलग श्रेणियां बनाई हैं. कम, मध्यम और अधिक ट्रैफिक वाली सड़कों के लिए अलग निर्माण लागत तय की गई है. सड़क पर वाहनों की संख्या और भार को ध्यान में रखते हुए उसकी डिजाइन, निर्माण सामग्री और परतों की मोटाई निर्धारित की जाएगी. विभाग का मानना है कि इससे सड़कें लंबे समय तक बेहतर स्थिति में बनी रहेंगी और बार-बार मरम्मत की जरूरत कम होगी.
नई दरों के अनुसार विभिन्न श्रेणियों की डामर सड़कों की प्रति किलोमीटर निर्माण लागत में लाखों रुपये की बढ़ोतरी हुई है. वहीं सीमेंट कंक्रीट सड़कों की लागत भी पहले के मुकाबले अधिक तय की गई है. रिपोर्ट के अनुसार, कुछ श्रेणियों में एक किलोमीटर सीसी सड़क के निर्माण पर लगभग 46 लाख रुपये तक की अतिरिक्त लागत आ सकती है.
सड़कों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विभाग ने पेवमेंट क्वालिटी कंक्रीट (PQC) और ड्राई लीन कंक्रीट (DLC) की परत की मोटाई बढ़ाने का फैसला भी लिया है. इससे सड़कों की भार वहन क्षमता बढ़ेगी और भारी वाहनों के लगातार आवागमन के बावजूद उनकी मजबूती बनी रहेगी.
PWD का कहना है कि नई मानक लागत लागू होने से सड़क निर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित होगी और भविष्य की परियोजनाओं का बजट अधिक सटीक तरीके से तैयार किया जा सकेगा. हालांकि, बढ़ी हुई लागत के कारण नई सड़क परियोजनाओं के लिए सरकार को पहले की तुलना में अधिक धनराशि की आवश्यकता होगी.