भोपाल: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और उनसे जुड़ी अनियमितताओं के मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. हाई कोर्ट ने चार विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित की हैं और निर्देश दिया है कि चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर मामलों के निपटारे का हरसंभव प्रयास किया जाए. इस फैसले का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है.
यह फैसला नीट यूजी समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देशभर में उठे विवाद के बीच आया है. हाल के महीनों में छात्रों और सामाजिक संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किए थे. इसके बाद केंद्र सरकार ने भी ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का आश्वासन दिया था.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया द्वारा जारी आदेश के अनुसार भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के जिला एवं अपर सत्र न्यायालयों को 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024' तथा उससे जुड़े अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में अधिसूचित किया गया है.
इससे पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी घोषणा की थी कि राज्य में पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई, शीघ्र न्याय और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालतें स्थापित की जाएंगी. सरकार का मानना है कि इससे परीक्षा से जुड़े अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी.
सरकारी जानकारी के अनुसार भोपाल में 18वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रवीण पटेल, ग्वालियर में आठवें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश विशाल अखंड, जबलपुर में 27वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश आनंद कुमार सेहलाम और इंदौर में 26वें जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. शुभ्रा सिंह को इन विशेष अदालतों की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
नई व्यवस्था के तहत इन अदालतों में पेपर लीक और लोक परीक्षाओं से जुड़े मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई होगी. अदालतों को निर्देश दिया गया है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर मामलों का निपटारा करने की पूरी कोशिश की जाए. हालांकि अंतिम समयसीमा प्रत्येक मामले की परिस्थितियों और न्यायिक प्रक्रिया पर भी निर्भर करेगी.
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य लोक परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना है. साथ ही परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कर छात्रों का भरोसा मजबूत करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है.