रांची: झारखंड की राजनीति इन दिनों काफी गरमा हुई हुई है. सत्तारूढ़ महागठबंधन के दो प्रमुख साथी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के बीच खींचतान साफ दिख रही है. सरकार की स्थिरता पर सवाल उठने लगे हैं. ठीक इसी माहौल में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव आज रांची पहुंचे हैं. वे पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे और संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर चर्चा करेंगे.
खनन माफिया को लेकर कांग्रेस के सख्त रुख के बाद यह दौरा खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है. तेजस्वी न सिर्फ अपनी पार्टी की जड़ें मजबूत करने आए हैं, बल्कि गठबंधन में RJD की आवाज को और प्रभावशाली बनाने की कोशिश भी कर रहे हैं.
झारखंड महागठबंधन के अंदर JMM और कांग्रेस के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है. कांग्रेस ने राज्य में खनन माफिया की सक्रियता पर जो सवाल उठाए हैं, उससे सियासी माहौल और गर्म हो गया है. ऐसे नाजुक वक्त में तेजस्वी यादव का रांची आना और पार्टी नेताओं से मीटिंग करना साफ संकेत दे रहा है कि RJD किसी भी भविष्य के राजनीतिक बदलाव के लिए खुद को तैयार रखना चाहती है. कार्यकर्ताओं के बीच उनका संबोधन सिर्फ प्रोत्साहन नहीं, बल्कि आगे की चुनौतियों से निपटने की तैयारी भी है.
आज दोपहर 12 बजे तेजस्वी यादव सम्मेलन स्थल पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता कैलाश प्रसाद यादव ने बताया कि तेजस्वी का मुख्य जोर बूथ स्तर पर मजबूत संगठन खड़ा करने पर रहेगा. वे कार्यकर्ताओं का मूड समझेंगे ताकि झारखंड के किसी भी राजनीतिक घटनाक्रम में राजद की एकजुटता और भूमिका मजबूत बनी रहे. यह प्रयास पार्टी को जमीनी स्तर पर और ज्यादा सक्रिय बनाने का है.
झारखंड RJD प्रभारी जयप्रकाश नारायण यादव और राष्ट्रीय महासचिव भोला प्रसाद यादव ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया. इस दौरान उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव, विधायक दल के नेता सुरेश पासवान समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. पार्टी चाहती है कि इस सम्मेलन के जरिए अपनी ताकत का पूरा अहसास कराया जाए. तेजस्वी के दौरे को यादगार बनाने के लिए नेताओं ने पूरी मेहनत की है.
सियासी गलियारों में चर्चा है कि आसपास के राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद झारखंड में भी कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर हो सकता है. तेजस्वी यादव इसी संभावित स्थिति को ध्यान में रखकर अपनी जमीन तैयार कर रहे हैं. RJD का मकसद सिर्फ पुराना जनाधार वापस लाना नहीं है, बल्कि पंचायत स्तर तक संगठन को मजबूत करके आने वाली चुनौतियों से मुकाबला करना भी है.
तेजस्वी का यह दौरा महागठबंधन की अंदरूनी खींचतान को नई दिशा दे सकता है. पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के साथ-साथ RJD अपनी स्थिति को और मजबूत बनाने की कोशिश में जुटी हुई है. झारखंड की राजनीति में RJD की बढ़ती सक्रियता से सत्ताधारी गठबंधन के अंदर नए समीकरण बन सकते हैं. फिलहाल सभी की नजरें तेजस्वी के संबोधन और आने वाले संकेतों पर टिकी हुई हैं.