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जेल सुपरिटेंडेंट ने महिला कैदी को बनाया हवस का शिकार, रेप कर कराया गर्भपात; कोर्ट ने स्वतः लिया मामले का संज्ञान

झारखंड हाई कोर्ट ने बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में महिला कैदी के कथित यौन शोषण मामले पर खुद संज्ञान लिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार और डीजीपी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
जेल सुपरिटेंडेंट ने महिला कैदी को बनाया हवस का शिकार, रेप कर कराया गर्भपात; कोर्ट ने स्वतः लिया मामले का संज्ञान
Courtesy: X

रांची स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल से सामने आए एक गंभीर मामले ने झारखंड की जेल व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि जेल सुपरिटेंडेंट ने एक महिला कैदी का यौन शोषण किया. इसके बाद वह गर्भवती हो गई. मामले को और गंभीर तब माना गया जब गर्भपात कराने और पूरे घटनाक्रम को दबाने की कोशिशों की बात सामने आई. झारखंड हाई कोर्ट ने इस मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए खुद संज्ञान लिया है और राज्य सरकार से जवाब मांगा है.

हाई कोर्ट ने दिखाई सख्ती

झारखंड हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को इस मामले पर खुद संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया. जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने वेकेशन कोर्ट में सुनवाई करते हुए पुलिस महानिदेशक को हलफनामा दाखिल करने का आदेश भी दिया. कोर्ट ने साफ कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है, जिस अधिकारी पर कैदियों की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी थी, उसी पर शोषण का आरोप लगा है.

महिला कैदी के आरोपों से मचा हड़कंप

मामले में सामने आई शुरुआती जानकारी के मुताबिक महिला कैदी ने जेल सुपरिटेंडेंट पर यौन शोषण का आरोप लगाया है. आरोप यह भी है कि शोषण के बाद वह गर्भवती हो गई थी और बाद में गर्भ गिराने की कोशिश की गई. जेल प्रशासन के भीतर इस तरह की घटना सामने आने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि जेल जैसी जगह पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है.

विपक्ष ने भी उठाई आवाज

विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी इस मामले को लेकर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है. उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए मामले की गंभीरता पर चिंता जताई. मरांडी ने कहा कि अगर जेल के भीतर ही महिला कैदी सुरक्षित नहीं हैं तो यह राज्य के लिए शर्मनाक स्थिति है. विपक्ष लगातार सरकार से पारदर्शी जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है.

जांच के लिए बनाई विशेष टीम

सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मामले की जांच के लिए तीन वरिष्ठ अधिकारियों की समिति बनाई गई है. इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम को भी स्वतंत्र जांच की जिम्मेदारी दी गई है. न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रुति सोरेन इस जांच की निगरानी करेंगी. प्रशासन का कहना है कि सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी. हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 8 जून को तय की है.