रांची: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल को लेकर चौंकाने वाले दावे किए हैं. मरांडी ने आरोप लगाया कि जेल में बंद एक महिला कैदी का न केवल जेल सुपरिटेंडेंट द्वारा शारीरिक शोषण किया गया बल्कि गर्भवती होने पर उस पर गर्भपात कराने का दबाव भी डाला गया.
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि जेल के भीतर एक बेसहारा महिला कैदी का जेल सुपरिटेंडेंट जो जेल का सबसे बड़ा अधिकारी है उनके द्वारा लगातार शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप पीड़िता इस समय गर्भवती है.
जेल की सलाखों के भीतर जो हुआ, उसने पूरे झारखंड को शर्मसार कर दिया है। रांची के होटवार जेल में न्यायिक अभिरक्षा में बंद एक महिला कैदी के साथ जेल सुपरिटेंडेंट द्वारा लगातार शारीरिक शोषण किए जाने और उसके गर्भवती हो जाने की घटना अत्यंत गंभीर, शर्मनाक और मानवता को झकझोर देने वाली है।… pic.twitter.com/JpyFqygakt
— Babulal Marandi (@yourBabulal) May 17, 2026
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपना पत्र साझा करते हुए, बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा हमला बोला. पत्र में उन्होंने लिखा, 'जेल की सलाखों के पीछे जो कुछ हुआ है, उसने पूरे झारखंड राज्य को शर्मसार कर दिया है. रांची की होटवार जेल में न्यायिक हिरासत में बंद एक महिला कैदी का जेल सुपरिटेंडेंट द्वारा लगातार शारीरिक शोषण किए जाने और उसके बाद उसके गर्भवती होने की यह घटना, एक अत्यंत गंभीर, शर्मनाक और बेहद विचलित करने वाली घटना है, जो मानवता की बुनियाद को ही हिलाकर रख देती है.'
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा है कि वह इस जघन्य अपराध पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने दावा किया कि जेल महानिरीक्षक खुद इस मामले को दबाने और दोषी जेल सुपरिटेंडेंट को बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. मरांडी ने आरोप लगाया कि बीमारी का झूठा बहाना बनाकर, पीड़िता जो एक गर्भवती महिला कैदी है.
उसको बार-बार जेल से बाहर अज्ञात स्थानों और अस्पतालों में ले जाया जा रहा है, जिसका मकसद अवैध मेडिकल हस्तक्षेप यानी गर्भपात के जरिए बायोलॉजिकल और फोरेंसिक सबूतों को नष्ट करना है. इसके अलावा चश्मदीदों को चुप कराने के लिए भारी रिश्वत बांटी जा रही है और कई अहम गवाहों का रातों-रात तबादला कर दिया गया है.
बाबूलाल मरांडी ने घटनाओं के इस पूरे क्रम को राज्य की चरमराई हुई प्रशासनिक नियंत्रण व्यवस्था का अकाट्य प्रमाण बताया है. उन्होंने मुख्यमंत्री को कड़ी चेतावनी देते हुए साफ शब्दों में कहा कि यदि इस गड़बड़ी के मुख्य सूत्रधार जेल अधीक्षक और सबूत नष्ट करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी जेल महानिरीक्षक के खिलाफ तत्काल और निर्णायक दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह साबित हो जाएगा कि मुख्यमंत्री और उनके शीर्ष अधिकारी इस जघन्य अपराध और राज्य में गहरे तक फैली संस्थागत भ्रष्टाचार में सीधे तौर पर शामिल हैं.
इस अत्यंत संवेदनशील मामले के सामने आने के साथ ही, व्यापक रूप से यह उम्मीद की जा रही है कि झारखंड का राजनीतिक परिदृश्य एक बड़े उथल-पुथल के दौर से गुजरने वाला है.