नई दिल्ली: दिल्ली में घर बनाने से पहले यह जानना जरूरी है कि प्लॉट के आकार के हिसाब से कितनी मंजिल तक निर्माण की अनुमति है. नियमों का पालन नहीं करने पर निर्माण को अवैध माना जा सकता है और संबंधित एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं. सत्यानिकेतन में बहुमंजिला इमारत गिरने की घटना के बाद अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं.
दिल्ली के भवन नियमों के अनुसार 50 वर्ग मीटर से बड़े आवासीय प्लॉट पर अधिकतम पांच मंजिल तक निर्माण किया जा सकता है. हालांकि पांच मंजिला इमारत के लिए ग्राउंड फ्लोर पर स्टिल्ट पार्किंग होना जरूरी है. स्टिल्ट पार्किंग का मतलब जमीन के स्तर पर बना ऐसा पार्किंग क्षेत्र है, जिसकी साइड खुली या आधी खुली होती है और ऊपरी ढांचा खंभों पर टिका होता है.
अगर पांच मंजिला भवन में अनिवार्य स्टिल्ट पार्किंग की व्यवस्था नहीं है, तो सामान्य तौर पर चार मंजिल तक निर्माण की अनुमति होती है. इसके साथ भवन की कुल ऊंचाई भी निर्धारित सीमा के अंदर रहनी चाहिए. पांच मंजिला निर्माण के मामले में कुल ऊंचाई 17.5 मीटर यानी करीब 57.4 फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए.
अगर आवासीय प्लॉट का क्षेत्रफल 50 वर्ग मीटर से कम है, तो यहां सामान्य तौर पर ग्राउंड प्लस दो मंजिल यानी कुल तीन स्तर तक निर्माण किया जा सकता है. हालांकि वास्तविक अनुमति प्लॉट की स्थिति, सड़क की चौड़ाई, स्थानीय नियमों और स्वीकृत बिल्डिंग प्लान पर निर्भर कर सकती है.
दिल्ली में मकान बनाने से पहले संबंधित प्राधिकरण से बिल्डिंग प्लान की मंजूरी लेना जरूरी है. बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण को अवैध माना जा सकता है. ऐसे मामलों में निर्माण रोकने, सील करने या अवैध हिस्से को हटाने जैसी कार्रवाई हो सकती है.
निर्माण की जगह और प्रकृति के आधार पर DDA की अनुमति, फायर विभाग की NOC और डस्ट कंट्रोल पोर्टल पर पंजीकरण जैसी अतिरिक्त आवश्यकताएं भी लागू हो सकती हैं.
दिल्ली के सत्यानिकेतन इलाके में रविवार को एक पुरानी बहुमंजिला इमारत उस समय ढह गई, जब उसमें मरम्मत का काम चल रहा था. यह इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास थी और इसमें लड़कों के लिए पेइंग गेस्ट सुविधा चल रही थी. हादसे में कम से कम सात लोगों की मौत हुई और कई लोग मलबे में फंस गए. बचाव एजेंसियों ने अभियान चलाकर लोगों को बाहर निकाला.