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India Daily

कोसी का कहर पास: 25 गेट खुले, गांव के गांव खाली कराए जाने लगे; जिलों में हाई अलर्ट

बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती दबाव और नेपाल में हो रही भारी बारिश के चलते कोसी नदी उफान पर है. बराज के 25 गेट खोल दिए गए हैं और सुपौल-सहरसा समेत कई जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है.

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Edited By: Reepu Kumari
कोसी का कहर पास: 25 गेट खुले, गांव के गांव खाली कराए जाने लगे; जिलों में हाई अलर्ट
Courtesy: Pinterest

उत्तर बिहार का शोक कही जाने वाली कोसी नदी एक बार फिर अपने रौद्र रूप में लौटती दिख रही है. बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती दबाव और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. जल संसाधन विभाग ने हाई अलर्ट जारी करते हुए चेताया है कि अगले 24 से 48 घंटों में वीरपुर बराज से 6 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा जा सकता है.

बराज पर तेजी से बदल रही स्थिति

वीरपुर कोसी बराज पर जलस्राव की स्थिति हर घंटे बदल रही है. गुरुवार दोपहर से ही नदी के तेवर तल्ख होने लगे थे. गुरुवार शाम डिस्चार्ज 1.77 लाख क्यूसेक था, जो शुक्रवार सुबह 9 बजे तक 1.90 लाख क्यूसेक को पार कर गया. यह लगातार बढ़ती रफ्तार ही प्रशासन की चिंता की सबसे बड़ी वजह बनी हुई है.

दबाव कम करने के लिए खोले गए 25 गेट

बराज की संरचना पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए कुल 56 में से 25 फाटक खोल दिए गए हैं. बाढ़ नियंत्रण वीरपुर के मुख्य अभियंता संजीव शैलेश के मुताबिक, बराज को किसी नुकसान से बचाने के लिए पानी को बीचोंबीच वाले गेटों से व्यवस्थित तरीके से डाउनस्ट्रीम की ओर बहाया जा रहा है.

पहले से बेघर हो चुके हैं दो सौ परिवार

हाल के दिनों में जलस्राव सवा से डेढ़ लाख क्यूसेक के बीच था, जिससे लोगों को उम्मीद थी कि इस साल संकट टल गया है. लेकिन पहले हुए कटाव में ही सुपौल के सत्तौर पंचायत अंतर्गत नारायणपुर और बिरजाईन के करीब दो सौ परिवार अपना घर-द्वार गंवा चुके हैं. अब नए अलर्ट ने उनकी नींद फिर उड़ा दी है.

प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद

सुपौल, सहरसा, खगड़िया और नवगछिया सहित पूरे कोसी क्षेत्र में प्रशासनिक अमला युद्धस्तर पर सक्रिय कर दिया गया है. खगड़िया जिला प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग भी पूरी तरह अलर्ट पर है. अधिकारी कोसी और बागमती के तटबंधों की सुरक्षा को लेकर कोई कोताही नहीं बरतना चाहते.

गांवों को खाली कराने की कवायद तेज

संभावित जलप्रलय को देखते हुए निचले इलाकों में बसे गांवों को खाली कराने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है. प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटा है, ताकि जानमाल का नुकसान कम से कम हो सके. स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और हर अपडेट के हिसाब से रणनीति बदली जा रही है.