बिहार की राजनीति में सक्रिय प्रशांत किशोर का एक बयान इन दिनों चर्चा में है. बांकीपुर सीट से विधायक प्रशांत किशोर दरभंगा जिले के महिनाम गांव में ब्राह्मण समाज के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे. यहां उन्होंने समाज को उसकी पुरानी ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की याद दिलाई.
साथ ही उन्होंने मुस्लिम समुदाय के प्रति सोशल मीडिया पर की जाने वाली आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि फेसबुक पर मुसलमानों को गाली देने से ब्राह्मण समाज आगे नहीं बढ़ेगा, बल्कि इससे उसका राजनीतिक और सामाजिक आधार कमजोर होगा.
प्रशांत किशोर ने अपने संबोधन में कहा कि ब्राह्मण समाज की पहचान उसकी ज्ञान परंपरा और शिक्षा से रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि जिस समाज के पास न जनबल, न धनबल और न ही बाहुबल था, उसे समाज में सम्मान क्यों मिला. उनके मुताबिक, इसकी वजह उनके पूर्वजों की जीवनशैली और संस्कार थे.
उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज के पूर्वज खुद कम भोजन करते थे, लेकिन अपने बच्चों की पढ़ाई से समझौता नहीं करते थे. इसके साथ ही वे दूसरों की मदद करने और जरूरतमंदों की चिंता करने को अपना संस्कार मानते थे. प्रशांत किशोर ने कहा कि आज समाज अपनी इसी विरासत से दूर होता जा रहा है और उसकी प्राथमिकताएं बदल रही हैं.
प्रशांत किशोर ने अपने भाषण में मुस्लिम समुदाय के प्रति दुर्भावना रखने और सोशल मीडिया पर अपशब्दों का इस्तेमाल करने पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज को यह समझना चाहिए कि आखिर मुसलमानों से उसकी किस बात की लड़ाई है. न जमीन को लेकर कोई संघर्ष है और न ही आरक्षण को लेकर कोई सीधी लड़ाई.
उन्होंने कहा कि पहले मुस्लिम समुदाय के लोग भी ब्राह्मणों को वोट देते थे और उन्हें गुरुजी कहकर सम्मान देते थे. उनके मुताबिक, एक समय करीब 20 फीसदी मुस्लिम मतदाता ब्राह्मणों के साथ खड़े होते थे, लेकिन राजनीतिक विचारधारा और व्यवहार में बदलाव के कारण यह समर्थन कम हुआ.
प्रशांत किशोर ने कहा कि ब्राह्मण समाज के एक वर्ग ने भाजपा का झंडा उठाकर घूमना शुरू किया, जिसके बाद मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन उससे दूर हो गया. उन्होंने सवाल किया कि जब दोनों समुदायों के बीच जमीन या आरक्षण को लेकर कोई विवाद नहीं है, तो फिर आपसी दुश्मनी की वजह क्या है.
उन्होंने सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ की जाने वाली टिप्पणियों को लेकर कहा कि फेसबुक पर गाली देने से राजनीतिक समर्थन वापस नहीं मिलेगा. उन्होंने कहा कि जिस समाज के लोग पहले आपको गुरुजी कहकर सम्मान देते थे, उनसे इस तरह दूरियां बढ़ाना समझदारी नहीं है.
अपने संबोधन में प्रशांत किशोर ने ब्राह्मण समाज को उसकी पारंपरिक पहचान और जिम्मेदारियों की भी याद दिलाई. उन्होंने परशुराम का जिक्र करते हुए कहा कि समाज को गलत रास्ते पर नहीं जाना चाहिए. ब्राह्मणों की असली ताकत कलम और किताब है, न कि फरसा चलाना.
उन्होंने अति पिछड़े समाज का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके पूर्वजों ने समाज के अलग-अलग वर्गों को साथ लेकर चलने की व्यवस्था बनाई थी. आज भी सामाजिक और राजनीतिक मजबूती के लिए सभी वर्गों के साथ संवाद और सम्मान जरूरी है.
प्रशांत किशोर का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण और विभिन्न समुदायों के मतदाताओं का समर्थन अहम भूमिका निभाते हैं. उनके इस संबोधन में शिक्षा, सामाजिक सद्भाव और राजनीतिक व्यवहार को लेकर कई महत्वपूर्ण संदेश देखने को मिले.