पटना: बिहार में कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की स्थिति परखने के लिए पुलिस मुख्यालय ने सख्त कदम उठाया है. मुख्यालय ने 36 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है, जिनमें 10 एडीजी, 8 आईजी और 18 डीआईजी रैंक के अफसर शामिल हैं. ये सभी अधिकारी अपने आवंटित जिलों में जाकर पुलिसिंग व्यवस्था की गहन समीक्षा करेंगे और जमीनी हकीकत से मुख्यालय को अवगत कराएंगे.
निर्धारित सभी वरिष्ठ अधिकारी अपने-अपने आवंटित जिलों का दौरा कर वहां की पुलिसिंग व्यवस्था को करीब से परखेंगे. क्षेत्रीय आईजी और डीआईजी भी 28 सितंबर तक संबंधित जिलों में मौजूद रहेंगे और वहीं रात्रि विश्राम भी करेंगे, ताकि जमीनी स्तर की वास्तविक स्थिति का सही अंदाजा लगाया जा सके.
इस दौरान जिलों में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, अनुसंधान की गुणवत्ता और लंबित कांडों के निष्पादन की स्थिति पर विशेष नजर रखी जाएगी. इसके साथ ही पुलिस गश्ती, लंबित वारंट, कुर्की और इश्तिहार से जुड़े मामलों की भी बारीकी से समीक्षा की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर ढिलाई सामने आ सके.
वरिष्ठ अफसर संबंधित जिलों के एसएसपी, एसपी और डीएसपी के साथ बैठकर पूरी समीक्षा करेंगे. इन अधिकारियों को जरूरी अभिलेख, आंकड़े और सूचनाएं तैयार रखने का निर्देश पहले ही दिया जा चुका है. इसका मुख्य मकसद यह जानना है कि जिले में पुलिसिंग व्यवस्था वास्तव में जमीन पर कितनी असरदार साबित हो रही है.
जिला भ्रमण पूरा होने के बाद सभी वरिष्ठ अधिकारियों को एक विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट तैयार करनी होगी. इस रिपोर्ट में जिलों में पाई गई कमियों के साथ-साथ उन्हें दूर करने के उपाय और जरूरी सुधार संबंधी सुझाव भी शामिल किए जाएंगे. यह पूरी रिपोर्ट 29 सितंबर तक पुलिस मुख्यालय को सौंपनी अनिवार्य होगी.
पुलिस मुख्यालय की यह पूरी कवायद ऐसे समय हो रही है, जब राज्य प्रशासन कानून-व्यवस्था को लेकर फील्ड मॉनिटरिंग और गश्ती बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहा है. 24 सितंबर को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भी डीएम-एसपी को अपराध पर जीरो-टॉलरेंस बरतने और निगरानी और मजबूत करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे.