पटना: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव इस बार राज्य की राजनीति का सबसे चर्चित मुकाबला बन गया है. बीजेपी ने अपने मजबूत गढ़ को बचाने के लिए युवा नेता अभिषेक कुमार सिन्हा बंटी पर भरोसा जताया है. दूसरी ओर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर खुद चुनावी मैदान में उतर चुके हैं, जबकि महागठबंधन ने आरजेडी की रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है. ऐसे में यह उपचुनाव सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की परीक्षा भी बन गया है.
भारतीय जनता पार्टी ने बांकीपुर उपचुनाव के लिए अभिषेक कुमार सिन्हा बंटी को उम्मीदवार घोषित किया है. टिकट मिलने के बाद उन्होंने कहा कि पार्टी ने एक साधारण कार्यकर्ता पर विश्वास जताया है. उन्होंने बताया कि वह करीब 26 वर्षों से बांकीपुर क्षेत्र में संगठन के साथ सक्रिय हैं और लगातार जनता के बीच काम करते रहे हैं. उनके मुताबिक चुनाव में जनता विकास और संगठन के काम को ही प्राथमिकता देगी.
अभिषेक कुमार सिन्हा को बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन का करीबी माना जाता है. नितिन नवीन लगातार पांच बार बांकीपुर से विधायक रहे और अब राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी. उनके इस्तीफे से खाली हुई सीट पर बीजेपी ने संगठन के पुराने और सक्रिय चेहरे को आगे कर राजनीतिक निरंतरता बनाए रखने की कोशिश की है.
अभिषेक सिन्हा कायस्थ समाज से आते हैं. बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में इस समुदाय की अच्छी संख्या मानी जाती है और चुनावी समीकरण में इसकी अहम भूमिका रहती है. वर्तमान में वह भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं. इससे पहले पटना महानगर भाजयुमो अध्यक्ष, मंडल मंत्री और महामंत्री जैसे कई संगठनात्मक दायित्व निभा चुके हैं. पार्टी उन्हें युवा और सक्रिय नेतृत्व के रूप में पेश कर रही है.
इस उपचुनाव को दिलचस्प बनाने वाली सबसे बड़ी वजह जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का खुद मैदान में उतरना है. वह लगातार बीजेपी के गढ़ में जीत का दावा कर रहे हैं. वहीं महागठबंधन ने एक बार फिर रेखा गुप्ता पर भरोसा जताया है. ऐसे में बांकीपुर में बीजेपी, जन सुराज और आरजेडी के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की पूरी संभावना बन गई है.
बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को होगी. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई तय की गई है. यह सीट नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उनके विधानसभा से इस्तीफा देने के कारण खाली हुई थी. राजनीतिक दृष्टि से बांकीपुर लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है. ऐसे में इस उपचुनाव का परिणाम बिहार की आगामी राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देगा.