जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ने के अपने फैसले को पूरी तरह रणनीतिक बताया है. एक मीडिया चैनल से बातचीत में विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि यह केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की नई सरकार की पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा है. उन्होंने कहा कि उन्होंने जानबूझकर भाजपा के मजबूत गढ़ बांकीपुर को चुना है, ताकि जनता के सामने एक स्पष्ट राजनीतिक विकल्प रखा जा सके.
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के लोगों को मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सीधे चुनने का अवसर नहीं मिला. उनके मुताबिक, यदि बांकीपुर में जन सुराज को जीत मिलती है तो इसे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और इस सीट के पूर्व विधायक नितिन नवीन के प्रति जनता की राय के रूप में देखा जाएगा. उन्होंने कहा कि यह उपचुनाव लोगों के लिए अपना जनमत व्यक्त करने का पहला बड़ा अवसर है.
Patna, Bihar: Jan Suraaj Party founder and Bankipur bypoll candidate Prashant Kishor says, "Please look at it this way. Personally, and as part of the Jan Suraaj vision, our objective was never just to become MLAs or MPs. Our sole aim in entering politics is to bring change in… pic.twitter.com/1L6i1LE35X
— IANS (@ians_india) July 6, 2026
पीके ने कहा कि चुनाव सिर्फ किसी राजनीतिक दल के नाम पर नहीं जीते जाते, बल्कि उम्मीदवार की विश्वसनीयता, योग्यता और काम करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है. उनका दावा है कि बांकीपुर की जनता एक ऐसे प्रतिनिधि को चुनना चाहेगी, जो उनकी समस्याओं को समझे, विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दे और विधानसभा में प्रभावी ढंग से उनकी आवाज उठाए.
बांकीपुर विधानसभा सीट नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई है. यह सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है और पटना की सबसे महत्वपूर्ण शहरी सीटों में गिनी जाती है. यहां व्यापारी, नौकरीपेशा और मध्यमवर्गीय मतदाताओं की बड़ी संख्या है. ऐसे में यह उपचुनाव भाजपा के लिए अपनी साख बचाने की चुनौती बन गया है, जबकि जन सुराज इसे अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने का बड़ा अवसर मान रही है. यही कारण है कि पूरे बिहार की नजर अब बांकीपुर के इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर टिकी हुई है.