8 जुलाई का दिन भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद खास है, क्योंकि इस दिन भारतीय क्रिकेट के दिग्गज और एक महान कप्तान सौरव गांगुली का बर्थडे है, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम को न केवल बनाया बल्कि भारत को उसके हीरो भी दिए. आज दादा अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं.
उन्होंने केवल मैच नहीं जिताए, बल्कि ऐसे खिलाड़ियों को अवसर दिया जिन्होंने आने वाले सालों में भारतीय क्रिकेट की दिशा बदल दी. वीरेंद्र सहवाग, महेंद्र सिंह धोनी, युवराज सिंह, हरभजन सिंह और जहीर खान जैसे खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही मंच देना दादा की सबसे बड़ी पहचान रही. उनके कई फैसलों का असर भारतीय क्रिकेट पर लंबे समय तक दिखाई दिया.
सौरव गांगुली ने कप्तान रहते हुए हमेशा नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने अक्सर युवा खिलाड़ियों को जिम्मेदारी देकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है. यही वजह रही कि कई नए चेहरे आगे चलकर भारतीय टीम की बैक बोन बने और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई.
वीरेंद्र सहवाग अपने शुरुआती दिनों में मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते थे. गांगुली ने उनकी आक्रामक शैली को देखते हुए उन्हें पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी दी. यह फैसला भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल प्रयोगों में शामिल हुआ. सहवाग ने टेस्ट और एकदिवसीय दोनों प्रारूपों में विस्फोटक बल्लेबाजी से कई यादगार पारियां खेलीं.
महेंद्र सिंह धोनी को धोनी बनाने का श्रेय दादा को जाता है, क्योंकि धोनी का शुरुआती प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा था. शुरुआती चार एकदिवसीय मुकाबलों में वह बड़ी पारी नहीं खेल सके. इसके बावजूद गांगुली ने उन पर भरोसा बनाए रखा. पाकिस्तान के खिलाफ उन्हें तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया, जहां उन्होंने 148 रनों की शानदार पारी खेलकर अपनी क्षमता साबित कर दी. फिर माही ने दादा के फैसले को सही साबित करते हुए भारत को गर्व करने के कई मौके दिए.
गांगुली ने केवल धोनी और सहवाग ही नहीं, बल्कि हरभजन सिंह, युवराज सिंह और जहीर खान जैसे खिलाड़ियों को भी लगातार मौके दिए. इन खिलाड़ियों ने आगे चलकर भारतीय टीम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. सालों बाद यही खिलाड़ी बड़े टूर्नामेंटों में भारत की जीत के मजबूत आधार बने.
सौरव गांगुली का नेतृत्व केवल मैदान तक सीमित नहीं था. वह खिलाड़ियों में आत्मविश्वास जगाने और कठिन परिस्थितियों में उनका साथ देने के लिए जाने जाते थे. उनकी सोच ने भारतीय क्रिकेट को नई आक्रामक पहचान दी. आज भी उनके कई फैसलों को भारतीय क्रिकेट के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ों में गिना जाता है.