नई दिल्ली: अमेरिका का अत्याधुनिक निगरानी ड्रोन MQ-4C ट्राइटन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर रहस्यमयी तरीके से लापता हो गया है. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम हुए मात्र दो दिन ही बीते हैं. ड्रोन इटली के सिगोनेला बेस की ओर लौट रहा था, लेकिन अचानक उसने रास्ता बदलकर ईरान की तरफ मोड़ा और इमरजेंसी कोड 7700 भेजा. इसके बाद वह तेजी से नीचे गिरने लगा और रडार से गायब हो गया. अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि ड्रोन दुर्घटनाग्रस्त हुआ या उसे मार गिराया गया.
MQ-4C ट्राइटन ड्रोन तीन घंटे तक फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य की निगरानी करने के बाद वापस लौट रहा था. फ्लाइट रडार24 के अनुसार, ड्रोन ने अचानक अपना रास्ता ईरान की तरफ मोड़ा और इमरजेंसी अलर्ट भेजा. कुछ ही मिनटों में वह रडार स्क्रीन से गायब हो गया. अमेरिकी नौसेना ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. विशेषज्ञों का कहना है कि इतना महंगा और एडवांस ड्रोन इतनी आसानी से लापता होना सामान्य घटना नहीं है.
MQ-4C ट्राइटन अमेरिका का सबसे महंगा ड्रोन है, जिसकी कीमत करीब 1600 करोड़ रुपये है. यह ड्रोन 50,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ सकता है और 24 घंटे से अधिक समय तक लगातार निगरानी कर सकता है. इसकी रेंज 7,400 नॉटिकल मील है. यह मुख्य रूप से समुद्री इलाकों की निगरानी के लिए बनाया गया है और P-8A पोसीडॉन विमानों के साथ मिलकर काम करता है. अमेरिकी नौसेना के पास फिलहाल 20 ऐसे ड्रोन हैं और आगे 7 और खरीदने की योजना है.
U.S. Navy MQ‑4C Triton squawks emergency, plunges over Persian Gulf before disappearing from radar cause unclear
An MQ‑4C high‑altitude surveillance drone abruptly transmitted a 7700 emergency code and lost altitude before vanishing from public tracking data over the Strait of… pic.twitter.com/mu0RaTDH87— Washington Eye (@washington_EY) April 9, 2026Also Read
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यह घटना अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम होने के महज दो दिन बाद हुई है. ईरान ने हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों के लिए खोलने पर सहमति जताई थी. ऐसे में इस ड्रोन के लापता होने से क्षेत्र में नया तनाव पैदा हो सकता है. अमेरिका अभी तक इसकी वजह नहीं बता पाया है. अगर ड्रोन को मार गिराया गया तो यह युद्धविराम के उल्लंघन का मामला बन सकता है.
अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण अमेरिका प्रतिदिन भारी खर्च कर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका हर सेकंड करीब 10,300 डॉलर (लगभग 9.8 लाख रुपये) खर्च कर रहा है. एक दिन में हथियारों और मिसाइलों पर 3,040 करोड़ रुपये, हवाई अभियानों पर 2,327 करोड़ रुपये और समुद्री ऑपरेशन पर 1,472 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं. मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर भी रोजाना 902 करोड़ रुपये का खर्च बताया जा रहा है.