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India Daily

दो साल तक दर्द से लड़ते रहे... आखिरकार हार गई जिंदगी! ट्रंप पर हुए हमले में बचे शख्स की दर्दनाक मौत

बटलर रैली में गोली लगने से बचे जेम्स कोपेनहावर का 76 साल की उम्र में निधन हो गया. दो साल तक शरीर में गोली के टुकड़े लिए वे दर्द सहते रहे, आखिरकार बुधवार को उन्होंने अंतिम सांस ली.

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Edited By: Reepu Kumari
दो साल तक दर्द से लड़ते रहे... आखिरकार हार गई जिंदगी! ट्रंप पर हुए हमले में बचे शख्स की दर्दनाक मौत
Courtesy: Pinterest

Trump Rally Shooting Survivor Death: अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य में 2024 में डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हमले में घायल हुए जेम्स कोपेनहावर अब इस दुनिया में नहीं रहे. मून टाउनशिप निवासी 76 वर्षीय कोपेनहावर का बुधवार को निधन हो गया. परिवार के वकील ने बताया कि वे अपनों के बीच घिरे हुए दुनिया से विदा हुए. मौत की वजह अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन दो साल पहले लगी गोलियों ने उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी थी.

हादसे ने बदल दी थी पूरी जिंदगी

13 जुलाई 2024 की वो शाम कोपेनहावर के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं थी. बटलर फार्म शो कॉम्प्लेक्स में ट्रंप की रैली के दौरान अचानक गोलियां चलने लगीं. हमलावर थॉमस मैथ्यू क्रूक्स ने पास की एक इमारत की छत से निशाना साधा था. इसी गोलीबारी में कोपेनहावर बुरी तरह घायल हो गए थे, जबकि उनकी आंखों के सामने रैली में मौजूद लोग इधर-उधर भागते नजर आए.

दो बार लगी गोली, बच गई जान

कोपेनहावर को उस दिन दो बार गोली लगी थी, एक बार बांह में और दूसरी बार पेट में. इसी हमले में पूर्व फायर चीफ कोरी कॉम्पेरेटोर की मौत हो गई थी, जबकि ट्रंप का कान भी गोली से छिल गया था. एक और शख्स डेविड डच भी उस दिन घायल हुए थे, हालांकि वे अब भी जीवित हैं. कोपेनहावर को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई गई थी.

सर्जरी दर सर्जरी, फिर भी नहीं मिला चैन

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी कोपेनहावर की तकलीफें कम नहीं हुईं. उनकी आंत तक क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसके चलते उन्हें कई बार सर्जरी करानी पड़ी. शरीर में गोली के कुछ टुकड़े हमेशा के लिए रह गए, और नसों को हुए नुकसान ने उन्हें दर्द के साथ जीना सिखा दिया. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने अनुभव सार्वजनिक रूप से साझा किए.

खुद बयां किया था वो खौफनाक पल

एक इंटरव्यू में कोपेनहावर ने बताया था कि उन्हें पहले एहसास ही नहीं हुआ कि उन्हें गोली लगी है. उन्होंने कहा था कि उनकी आस्तीन अचानक जोर से खिंची और कुछ तेजी से गुजरता हुआ महसूस हुआ. इसके तुरंत बाद दूसरी गोली ने उन्हें झकझोर दिया, हालांकि वे गिरे नहीं. यही हिम्मत आगे चलकर उनकी पहचान बन गई.

सरकार पर मुकदमा भी किया था दायर

इस साल जून में कोपेनहावर और उनके परिवार ने अमेरिकी सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. इसमें आरोप लगाया गया कि सुरक्षा एजेंसियों की लापरवाही के चलते वे गोली का शिकार बने. जांच में भी यह सामने आया था कि हमले से पहले सुरक्षा व्यवस्था में कई खामियां थीं, जिसके चलते तत्कालीन सीक्रेट सर्विस निदेशक को इस्तीफा तक देना पड़ा था.