सऊदी अरब ने अगस्त महीने के लिए एशियाई ग्राहकों को मिलने वाले अपने प्रमुख कच्चे तेल अरब लाइट की कीमत में पिछले कम से कम 26 वर्षों की सबसे बड़ी कटौती की है. सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने इसकी कीमत क्षेत्रीय बेंचमार्क से 1.50 डॉलर प्रति बैरल कम तय की है. यह कटौती बाजार के अनुमान से भी अधिक है. माना जा रहा है कि वैश्विक बाजार में तेल की बढ़ती आपूर्ति और खरीदारों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण यह फैसला लिया गया है.
जून के मध्य के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में लगातार गिरावट देखी गई है. अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम के बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य होने लगी, जिससे तेल की आपूर्ति फिर तेज हो गई. इसके चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ी और कीमतों पर दबाव बना. फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है.
सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व वाले ओपेक+ समूह ने अगस्त से तेल उत्पादन कोटा में एक और बढ़ोतरी पर सहमति जताई है. युद्ध के दौरान उत्पादन बढ़ाने का असर सीमित था, क्योंकि होर्मुज मार्ग पूरी तरह सामान्य नहीं था. अब समुद्री यातायात सुचारु होने से सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे खाड़ी देशों को अधिक उत्पादन करने का अवसर मिलेगा. इससे वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति और बढ़ने की संभावना है.
विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में यह बड़ी कटौती एशिया के रिफाइनरी उद्योग के लिए राहत भरी हो सकती है. सऊदी अरब का यह कदम एशियाई बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ग्राहकों को आकर्षित करने की रणनीति माना जा रहा है. आने वाले महीनों में यदि वैश्विक आपूर्ति इसी तरह बढ़ती रही, तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.