नई दिल्ली: राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने किसी भी न्यूक्लियर हथियार के टेस्ट का ऑर्डर नहीं दिया है, ऐसा कहना है रूस का। रूस ने कहा है कि देश अभी भी नियमों का पालन करता है। ये वही नियम हैं जिनमें न्यूक्लियर हथियारों के टेस्ट पर रोक लगाना शामिल हैं। यह उस बयान के बाद आया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका को अपने न्यूक्लियर हथियारों का टेस्ट फिर से शुरू कर देना चाहिए.
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बताया कि पुतिन ने कई बार यह साफ किया है कि रूस न्यूक्लियर हथियारों का टेस्ट करने के अपने वादे का पालन करता रहेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि अगर कोई दूसरा देश खासकर यूनाइटेड स्टेट्स फिर से टेस्ट शुरू करता है, तो रूस भी मिलिट्री बैलेंस बनाए रखने के लिए ऐसा ही करेगा. इसके साथ ही कहा है कि ग्लोबल सुरक्षा के लिए दोनों पक्षों को न्यूक्लियर पावर में बराबर रखना बहुत जरूरी है.
ट्रंप ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि उन्होंने अमेरिकी रक्षा विभाग से न्यूक्लियर हथियारों का टेस्ट बराबर आधार पर शुरू करने के लिए कहा था. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पास किसी भी दूसरे देश के मुकाबले ज्यादा न्यूक्लियर हथियार हैं, जिसका श्रेय राष्ट्रपति के तौर पर उनके पहले कार्यकाल के दौरान किए गए अपग्रेड को जाता है.
इसके साथ ही ट्रंप ने आगे कहा कि वह हथियार की टेस्टिंग दोबारा शुरू नहीं करना चाहते थे क्योंकि इसकी इसकी पावर बुहत ज्यादा विनाशकारी है। उन्हें लगा कि उनके पास कोई विकल्प नहीं है. उनके अनुसार, न्यूक्लियर पावर के मामले में रूस दूसरे नंबर पर है और चीन काफी पीछे है लेकिन पांच साल के अंदर बराबरी कर सकता है.
इस बीच, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि मॉस्को अभी भी वाशिंगटन से पुतिन के उस प्रस्ताव पर जवाब का इंतजार कर रहा है, जिसमें अगले साल फरवरी में न्यू स्टार्ट संधि खत्म होने के बाद भी दोनों पक्षों के न्यूक्लियर हथियारों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की बात कही गई है. लावरोव ने कहा कि यह विचार सरल और निष्पक्ष है और रूस किसी भी नतीजे के लिए तैयार है, हालांकि उसे सकारात्मक नतीजे की उम्मीद है.
बता दें कि कुछ ही समय पहले रूस ने ब्यूरेवेस्तनिक न्यूक्लियर-पावर्ड क्रूज मिसाइल और पोसाइडन अंडरवाटर ड्रोन जैसे नए हथियारों का टेस्ट किया. इन टेस्ट से अमेरिका चिंतित हो गया, लेकिन रूसी विशेषज्ञों ने कहा कि ये न्यूक्लियर विस्फोट के टेस्ट नहीं थे, इसलिए ये टेस्टिंग बैन का उल्लंघन नहीं करते हैं.