नई दिल्ली: मीडिल ईस्ट में तनाव देखते ही देखते काफी हद तक बढ़ चुका है. एक ओर इजरायल और अमेरिका है. वहीं दूसरी तरफ ईरान को बैक सपोर्ट देता मीडिल ईस्ट के कुछ देश, हालांकि जंग के वक्त कौन किसका और कितना साथ देगा इस बात का दावा अभी नहीं किया जा सकता है. लेकिन अमेरिका और इजरायल एक है इस बात में कोई संशय नहीं है.
पेंटागन में अमेरिका और इजरायल के बीच सीक्रेट मीटिंग हुई है. हालांकि इस मीटिंग में किस विषय पर चर्चा की गई, इसके बारे में अभी कहा जाना मुश्किल हैं लेकिन अटकलें लगाई जा रही है कि इस बैठक में ईरान चर्चे का केंद्र रहा होगा.
ईरान ने कुछ दिनों पहले डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगातार दी जा रही धमकी पर जवाब दिया था. जिसमें कहा गया कि ईरान पर कोई भी हमला क्षेत्रीय युद्ध में बदल जाएगा. ऐसे में पेंटागन के बंद कमरे में अमेरिका और इजरायल क्या बात कर रहे हैं, इसे आसानी से समझा जा सकता है. सूत्रों से मिली जानकारी में यह भी कहा जा रहा है कि इस बैठक में अमेरिकी जनरल डैन केन और इजरायली सशस्त्र बलों के चीफ भी मौजूद थे.
वहीं दूसरी तरफ इस बैठक के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपने अधिकारियों के साथ लगातार टच में बने हुए हैं. इजरायली मीडिया रिपोर्ट में यह कहा जा रहा है कि इजरायल अब सैन्य कार्रवाई पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. हालांकि इससे पहले कहा जा रहा था कि सऊदी अरब और यूएई जैसे ने मीडिल ईस्ट के देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमला ना करने के लिए मना लिया था. लेकिन ईरान की चेतावनी से अमेरिका अब अपना आपा खो चुका है.
ईरान के सुप्रीम नेता खामेनेई ने अमेरिका द्वारा लगातार दी जा रही धमकी पर चेतावनी जारी की थी. जिसमें कहा गया था कि अगर अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला किया जाता है तो यह संघर्ष केवल दो देशों तक नहीं रहेगा बल्कि पूरे क्षेत्र में फैल जाएगा. उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी युद्ध की शुरुआत नहीं करेगा लेकिन अगर उनके देश पर हमला किया जाता है तो ईरानी जनता उन लोगों को करारा जवाब देंगी. उन्होंने कहा कि अगर युद्ध शुरू हुआ तो यह एक क्षेत्रीय युद्ध होगा. हालांकि अमेरिका भी इसके लिए धीरे-धीरे तैयार कर रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर एक विशाल नौसैनिक बेड़ा भेजा है.