नई दिल्ली: पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत इन दिनों हिंसा की आग में झुलस रहा है. पिछले दो दिनों में यहां भयानक खूनखराबा हुआ है, बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के हमलों के बाद पाकिस्तानी सेना ने बड़े पैमाने पर अभियान शुरू कर दिया है. इस दौरान सैकड़ों लोग मारे गए हैं. इसके साथ ही इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई है और कई इलाकों में सड़कें और ट्रेन सेवा भी ठप हो गई है. मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने बताया कि यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा संघर्ष है. पाकिस्तान इस हिंसा का दोष भारत पर डाल रहा है, जबकि भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है.
बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने क्वेटा में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पिछले 40 घंटों में 145 आतंकवादी मारे गए और उनके शव सुरक्षाबलों के कब्जे में हैं. उन्होंने बताया कि इनमें तीन आत्मघाती हमलावर भी शामिल हैं. दूसरी ओर 17 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं. सेना ने क्वेटा, मस्तुंग, नुश्की, ग्वादर जैसे कई इलाकों में मुठभेड़ की और विद्रोहियों के हमलों को नाकाम कर दिया.
हिंसा के बाद बलूचिस्तान में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई है. ट्रेनें रुकी हुई हैं और कई सड़कें अवरुद्ध हैं. क्वेटा के बाजार और सड़कें सुनसान पड़े हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि घर से निकलना जान जोखिम में डालना जैसा हो गया है. दो महिला आत्मघाती हमलावरों का इस्तेमाल भी किया गया है.
BLA ने जेल, सेना के ठिकानों, सरकारी दफ्तरों पर कई हमले किए हैं. एक डिप्टी डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर का अपहरण भी कर लिया है. क्वेटा में 12 अलग-अलग जगहों पर हमले हुए हैं. सुरक्षाबलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर पहले से अलर्ट रहकर कार्रवाई की है. आम नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और मजदूरों को भी निशाना बनाया गया है, जिसमें 18 लोगों की जान चली गई है.
पाकिस्तान ने इस हिंसा के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया है. सेना और सरकार ने कहा कि विद्रोहियों को बाहर से मदद मिल रही है. वहीं भारत के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को बेबुनियाद करार दिया. भारत ने कहा कि पाकिस्तान को बलूचिस्तान के लोगों की मांगों पर ध्यान देना चाहिए और वहां हो रहे अत्याचार रोकने चाहिए, न कि भारत का नाम लेकर अपनी नाकामियों से ध्यान हटाना चाहिए.