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‘बस अब थोड़ा सुकून चाहिए...’ Qatar PM की दुनिया से अपील, बोले- 2027 तो शांति का साल रहने दो

कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद ने 2027 को क्षेत्र के लिए शांतिपूर्ण साल बनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि 2022 विश्व कप के बाद से कतर लगातार क्षेत्रीय संकटों से प्रभावित रहा है और अब उसे राहत चाहिए.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
‘बस अब थोड़ा सुकून चाहिए...’ Qatar PM की दुनिया से अपील, बोले- 2027 तो शांति का साल रहने दो
Courtesy: social media

मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी संघर्ष का असर खाड़ी देशों पर भी दिखाई दे रहा है. कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान ने लगातार संकटों के बीच 2027 में शांति और स्थिरता की अपील की. उन्होंने कहा कि कतर को पिछले कई वर्षों से राहत का मौका नहीं मिला है.

2027 के लिए कतर ने मांगा शांतिपूर्ण साल

कतर के प्रधानमंत्री ने रविवार को कतर इकोनॉमिक फोरम में क्षेत्रीय हालात पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि 2022 में फीफा विश्व कप की मेजबानी के बाद से कतर लगातार संकटों के बीच रहा है. अक्टूबर 2023 में इजरायल पर हमास के हमले के बाद शुरू हुए युद्ध ने पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया. शेख मोहम्मद ने कहा कि अब 2027 ऐसा साल होना चाहिए, जिसमें क्षेत्र को कुछ राहत और स्थिरता मिल सके.

विश्व कप की सफलता का भी किया जिक्र

कतर के प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान 2022 फीफा विश्व कप का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट की मेजबानी मिलने से पहले कतर की क्षमता पर सवाल उठाए गए थे और कई लोगों ने इसके असफल होने की आशंका जताई थी. उनके मुताबिक, कतर ने सफल आयोजन कर अपनी क्षमता साबित की. उन्होंने कहा कि हर संकट के दौरान उनका देश पहले से मजबूत होकर उभरा है.

ईरान को लेकर कतर के पीएम का बयान

ईरान को क्षेत्र में परेशानी पैदा करने वाला देश माना जाना चाहिए या नहीं, इस सवाल पर शेख मोहम्मद ने कहा कि कतर के अनुभव से तेहरान को ‘शांति स्थापित करने वाला’ नहीं कहा जा सकता. उन्होंने क्षेत्र में अमेरिकी-इजरायली संघर्ष और उसके बाद पैदा हुए हालात का जिक्र किया. उनका बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर खाड़ी क्षेत्र, समुद्री परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है.

LNG कारोबार पर पड़ा युद्ध का असर

कतर दुनिया के प्रमुख LNG निर्यातकों में शामिल है, लेकिन संघर्ष के कारण उसके गैस कारोबार को बड़ा नुकसान हुआ है. रॉयटर्स के आंकड़ों के अनुसार, युद्ध के छह महीने में कतर का LNG निर्यात 96 फीसदी तक गिर गया. इस दौरान करीब 24 अरब डॉलर की गैस बिक्री प्रभावित हुई. होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की बाधाओं और दो कतर के LNG टैंकरों पर हमलों से आपूर्ति प्रभावित हुई. युद्ध से पहले कतर दुनिया की करीब पांचवीं LNG जरूरत पूरी करता था.