नई दिल्ली: पाकिस्तान और कजाकिस्तान दोनों देशों ने बीते बुधवार को एक संयुक्त घोषणा जारी की थी. इसमें दावा किया गया था कि दोनों देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC के प्रस्तावों के आधार पर जम्मू और कश्मीर मुद्दे को सुलझाने का समर्थन करते हैं. पाकिस्तान के दावों के उलट, कजाकिस्तान की आधिकारिक वेबसाइट और उसकी सरकारी समाचार एजेंसी ने कश्मीर मुद्दे का जिक्र तक नहीं किया.
कजाकिस्तान द्वारा जारी किए गए आधिकारिक दस्तावेजों में सिर्फ आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी और व्यापार समझौतों का जिक्र है. हालांकि, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी संयुक्त घोषणा के पैराग्राफ 15 में साफ तौर पर कश्मीर का जिक्र है.
इस दौरे के दौरान लगभग 37 से 60 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए. इनमें खनिज उद्योग और भूवैज्ञानिक विज्ञान में सहयोग, संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में इकाइयों की संयुक्त तैनाती पर एक समझौता और कराची और ग्वादर बंदरगाहों और 'ट्रांस-कैस्पियन' परिवहन गलियारे तक कजाकिस्तान की पहुंच पर चर्चा शामिल थी. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग पर भी चर्चा हुई.
भारत के साथ कजाकिस्तान का गहरा रणनीतिक और आर्थिक संबंध है. कहीं न कहीं यही वजह हो सकती है, जिसके वजह से कजाकिस्तान ने पारंपरिक रूप से कश्मीर मुद्दे पर तटस्थ रुख बनाए रखा है. भारत हमेशा से कश्मीर को एक द्विपक्षीय मुद्दा मानता रहा है और किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप या पुराने UNSC प्रस्तावों के संदर्भ का विरोध करता है.
पहले भी पाकिस्तान की ओर से 'ऑपरेशन सिंदूर' के सीजफायर में दूसरे देशों की मध्यस्ता की बात की गई है लेकिन भारत की ओर से इसे हमेशा साफ इनकार किया गया है.
राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कजाकिस्तान ने सच में इस बयान पर हस्ताक्षर किए हैं, तो इससे भारत के साथ उसके संबंधों में तनाव आने की संभावना है. हालांकि, कजाकिस्तान की ओर से अभी तक आधिकारिक पुष्टि की कमी से पता चलता है कि यह पाकिस्तान की 'राजनयिक चाल' हो सकती है. जिसके वजह से भारत और कजाकिस्तान के रिश्तों में खटास आए और दूरी बने.