नई दिल्ली: वेनेजुएला में अमेरिकी सेना के ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है. राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद अब उत्तर कोरिया ने इस पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है. उत्तर कोरिया ने सीधे तौर पर अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि यह एक आजाद देश की आजादी और उसकी गरिमा का गंभीर उल्लंघन है.
उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी ने विदेश मंत्रालय के हवाले से एक बयान जारी किया है. इस बयान में अमेरिका की इस कार्रवाई को गुंडागर्दी और बदमाश स्वभाव बताया गया है. उत्तर कोरिया का कहना है कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों को ताक पर रखकर एक संप्रभु राष्ट्र के नेता को गिरफ्तार किया है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता.
उत्तर कोरिया के प्रवक्ता ने कहा, "अमेरिका दुनिया भर में अपना दबदबा कायम करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. वेनेजुएला की स्थिति यह साबित करती है कि वाशिंगटन अंतरराष्ट्रीय नियमों को रद्दी का टुकड़ा समझता है."
उत्तर कोरिया ने सिर्फ बयान ही नहीं दिया, बल्कि पूरी दुनिया से एकजुट होने का आह्वान भी किया है. प्योंगयांग का मानना है कि यदि आज दुनिया इस अमेरिकी वर्चस्व के खिलाफ चुप रही, तो आने वाले समय में इसके परिणाम विनाशकारी होंगे.
देश की आजादी का हनन: उत्तर कोरिया के अनुसार, किसी दूसरे देश में घुसकर वहां के राष्ट्रपति को पकड़ना संप्रभुता का सबसे बड़ा अपमान है.
क्षेत्रीय अस्थिरता: इस गिरफ्तारी से पूरे लैटिन अमेरिका में हिंसा और अस्थिरता फैलने का खतरा बढ़ गया है.
गलत मिसाल: अगर अमेरिका इसमें सफल होता है, तो वह भविष्य में किसी भी दूसरे देश के साथ ऐसा कर सकता है.
रूस और चीन पहले ही अमेरिका की इस कार्रवाई की निंदा कर चुके हैं. अब उत्तर कोरिया के इस कड़े रुख ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है. जानकारों का कहना है कि यह मामला अब केवल वेनेजुएला तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अमेरिका बनाम विरोधी देशों (रूस, चीन, उत्तर कोरिया) की एक बड़ी जंग का रूप ले सकता है.