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क्यों ट्रंप ने मादुरो की पत्नी सिलिया फ्लोरेस को भी बनाया निशाना? असली कारण जानकर रह जाएंगे हैरान!

नेजुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस ऑपरेशन में न केवल राष्ट्रपति निकोलस मादुरो, बल्कि उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को भी गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया है.

Ashutosh Rai
Edited By: Ashutosh Rai
क्यों ट्रंप ने मादुरो की पत्नी सिलिया फ्लोरेस को भी बनाया निशाना? असली कारण जानकर रह जाएंगे हैरान!
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नई दिल्लीः वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस ऑपरेशन में न केवल राष्ट्रपति निकोलस मादुरो, बल्कि उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को भी गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया है. डिजिटल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक फर्स्ट लेडी की गिरफ्तारी की रणनीतिक आवश्यकता क्या थी.

फ्लोरेस की गिरफ्तारी

विशेषज्ञों के अनुसार, सिलिया फ्लोरेस केवल मादुरो की पत्नी नहीं, बल्कि उनके प्रशासन की रीढ़ की हड्डी मानी जाती हैं. वेनेजुएला की संसद की सदस्य और एक चतुर राजनीतिज्ञ होने के नाते वे मादुरो की अनुपस्थिति में जनता और सेना को एकजुट करने की क्षमता रखती थीं.

हमला' नहीं, लॉ एनफोर्समेंट

ट्रंप प्रशासन ने इस पूरे सैन्य मिशन को ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व कोडनेम दिया है. दिलचस्प बात यह है कि इसे एक युद्ध के बजाय एक कानून प्रवर्तन कार्रवाई के रूप में पेश किया जा रहा है. इसके पीछे छुपे कारणों में से एक है कि किसी देश पर हमला करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की अनुमति अनिवार्य है. इसे अपराधी को पकड़ने की कार्रवाई बताकर ट्रंप ने इसे दरकिनार कर दिया.  वहीं अमेरिका का दूसरा तर्क है कि मादुरो सरकार एक आपराधिक गिरोह की तरह काम कर रही थी.

रणनीतिक लक्ष्य

वर्तमान में यह जोड़ा ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में है. अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वेनेजुएला के तेल भंडार को सुरक्षित करना और वहां जारी प्रवासन के संकट को रोकना है.

तीसरा विश्व युद्ध करीब

रूस और चीन ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़ी निंदा की है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी इस मुद्दे पर तीखी बहस की उम्मीद है. 2005 से लगे प्रतिबंधों के बाद, अमेरिका का यह सीधा सैन्य हस्तक्षेप वेनेजुएला के भविष्य को एक अनिश्चित मोड़ पर ले आया है.

वहीं कई लोगों के मुताबिक अमेरिका का यह रूख तीसरे विश्व युद्ध की ओर संकेत कर रहा है. ब्रिटेन और फ्रांस ने भी सीरिया पर हमला कर साफ कर दिया कि वह भी इस काम में पीछे नहीं रहेंगे. साथ ही नार्थ कोरिया ने भी जापान को चेताया है. इसके बाद तीसरे विश्व युद्ध की अटकले तेज हो रही हैं.