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'मौलाना बाहर जाए', ईरान में कैसे शुरू हुआ हिंसक प्रदर्शन; जानें अब तक की हर डिटेल

ईरान में महंगाई और आर्थिक संकट के विरोध में हुए प्रदर्शन गंभीर हो गए हैं. कई शहरों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कम से कम सात लोग मारे गए और दर्जनों गिरफ्तार हुए.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'मौलाना बाहर जाए', ईरान में कैसे शुरू हुआ हिंसक प्रदर्शन; जानें अब तक की हर डिटेल
Courtesy: @general_he42676

नई दिल्ली: ईरान में तेज महंगाई और आर्थिक असंतोष के कारण विरोध प्रदर्शन रविवार (27 दिसंबर 2025) से शुरू हुए. शुरू में तहरान के व्यापारिक क्षेत्रों में हुए प्रदर्शन अब देश के अन्य हिस्सों तक फैल गए हैं. प्रदर्शनकारियों ने शासन के खिलाफ नारे लगाए और कुछ शहरों में हिंसक झड़पें हुईं. सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में कई लोग मारे गए और दर्जनों गिरफ्तार किए गए. विरोध अब देश की ग्रामीण और प्रांतीय क्षेत्रों तक पहुंच चुका है.

कहां से शुरू हुए प्रदर्शन?

प्रदर्शन की शुरुआत तहरान में हुई, जहां दुकानदारों ने बढ़ती महंगाई और आर्थिक ठहराव के खिलाफ हड़ताल की. इसके बाद विरोध अन्य शहरों और प्रांतों में फैल गया. सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कई लोग घायल हुए और सात लोगों की  जान भी चली गई. लोर प्रांत और उसके आसपास के क्षेत्रों में हिंसा सबसे अधिक रही.

सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया

तहरान में 30 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, जिन पर सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने का आरोप था. अधिकारियों ने कहा कि मालार्ड जिले में हुए प्रदर्शन के लिए सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने समन्वित कार्रवाई की. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और अन्य साधनों का उपयोग किया.

ग्रामीण क्षेत्रों में हिंसा

अजना और लॉर्डेगन जैसे शहरों में प्रदर्शन अधिक हिंसक रूप धारण कर गए. ऑनलाइन वीडियो में सड़कों पर आग और गोलियों की आवाज़ सुनाई दी. प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक भवनों और बैंक पर पत्थरबाज़ी की. पुलिस ने कई प्रमुख प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है. इस हिंसा में कई लोगों की मौत हुई और संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा है.

प्रदर्शनकारियों ने लगाए नारे

प्रदर्शनकारियों ने 'जब तक मौलाना नहीं जाते, यह देश मुक्त नहीं होगा' और 'मौलाना ईरान से बाहर जाएं' जैसे नारे लगाए. सोशल मीडिया पर दर्जनों वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें युवा प्रदर्शनकारी झंडे जलाते और सरकार के खिलाफ नारे लगाते दिखे.

सरकार ने दी प्रतिक्रिया

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेझेशकियन ने प्रदर्शनकारियों की 'वैध मांगों' को मान्यता दी. उन्होंने आर्थिक सुधार की दिशा में कार्रवाई का भरोसा दिलाया, लेकिन साथ ही स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए कड़ा रुख अपनाने की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि यदि लोगों की जीविका की समस्याओं को हल नहीं किया गया, तो यह गंभीर परिणाम ला सकता है.

अंतरराष्ट्रीय और मीडिया प्रतिक्रिया

ईरान में प्रदर्शन और हिंसा पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठन भी नजर रखे हुए हैं. पत्रकार मसिह अलीनेजाद ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किए और बताया कि युवा सड़कों पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. कई देशों ने ईरान से संयम बरतने और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का सम्मान करने का आग्रह किया है.

आर्थिक संकट का असर

महंगाई दर दिसंबर 2025 में 52% रिकॉर्ड की गई. ईरान की मुद्रा तेजी से गिर रही है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बढ़ती कीमतें और आर्थिक असुरक्षा उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाल रही हैं. सरकार ने महंगाई और बेरोजगारी की समस्या को हल करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन देश में आर्थिक संकट अभी भी गहरा बना हुआ है.